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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री के कर्तव्यों तथा मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व और व्यक्तिगत जिम्मेदारी से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय या उसके कृत्यों का निर्वहन करते समय राज्य सभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और न ही वह उस अवधि के दौरान राज्य सभा के सभापति को मिलने वाले वेतन या भत्ते का हकदार होगा।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 75(2) के प्रावधान के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह के बिना भी राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक विवेकशील (Discretionary) संवैधानिक अधिकार है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि यदि राष्ट्रपति किसी विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के लिए संसूचित करने की अपेक्षा करे, तो प्रधानमंत्री उसे उस विषय को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने के लिए बाध्य है, हालांकि यदि मंत्रिपरिषद उस पर कोई निर्णय न ले, तब भी प्रधानमंत्री अपनी इच्छा से राष्ट्रपति को निर्णय दे सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 69 के अंतर्गत जब उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्य सभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन नहीं करता है और उसे उस अवधि के दौरान राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं, न कि सभापति के। कथन 2 गलत है: मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण अवश्य करते हैं, किंतु राष्ट्रपति किसी मंत्री को अपनी इच्छा से या प्रधानमंत्री की सलाह के बिना नहीं हटा सकता; राष्ट्रपति किसी मंत्री को केवल तभी बर्खास्त कर सकता है जब प्रधानमंत्री उसे ऐसा करने की सलाह देता है। मंत्रिपरिषद का सामूहिक और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व प्रधानमंत्री की स्थिति पर निर्भर करता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 78(c) के अनुसार यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए संसूचित करने की अपेक्षा करे, तो प्रधानमंत्री उसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने के लिए बाध्य है, न कि बिना मंत्रिपरिषद के निर्णय के अपनी मर्जी से कोई मनमाना निर्णय दे सकता है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल का संदर्भ ले सकते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्षों के लिए प्रवृत्त रहता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, ऐसे विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों के समान हित हों, तथा नीतिगत समन्वय पर विचार करना है, जिसके निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, और इस परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा-राज्यसभा के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों (अनुच्छेद 117) के मामलों में लागू होता है, किंतु यह प्रक्रिया धन विधेयकों (Money Bills) और संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के संबंध में लागू नहीं की जा सकती है।
2. लोकसभा द्वारा पारित और राज्यसभा को भेजे गए किसी साधारण विधेयक को यदि राज्यसभा द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है या राज्यसभा उसमें ऐसे संशोधनों से सहमत नहीं होती है जिन्हें लोकसभा स्वीकार न करे, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए संयुक्त बैठक आहूत कर सकता है, जिसकी अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है।
3. लोकसभा का विघटन होने पर राज्यसभा में लंबित ऐसा कोई भी विधेयक जो लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया हो, व्यपगत (Lapse) हो जाता है, जबकि राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक बुलाए जाने की अधिसूचना जारी होने के पश्चात् यदि लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो भी संयुक्त बैठक आहूत की जाएगी और विधेयक व्यपगत नहीं होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है?
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 14 के अंतर्गत प्रदत्त 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) का विचार ब्रिटिश संविधान से लिया गया है और यह एक नकारात्मक संकल्पना है जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में विशेष विशेषाधिकारों का अभाव, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the laws) अमेरिकी संविधान से लिया गया है जो एक सकारात्मक संकल्पना है।
2. अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत प्रत्येक नागरिक को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राज्य को इस अधिकार पर अनुसूचित जनजातियों के हितों के संरक्षण के लिए या किसी व्यवसाय के लिए आवश्यक तकनीकी योग्यता तय करने हेतु उचित प्रतिबंध लगाने की पूर्ण शक्ति है।
3. आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने पर अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह स्वतंत्रताएँ स्वतः निलंबित हो जाती हैं, भले ही वह आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर लगाया गया हो या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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पादप और जन्तु में मुख्य अंतर क्या है?
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