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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली तथा संसद के प्रति उनके उत्तरदायित्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में यदि किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कृत्यों का प्रयोग करेगा, हालांकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह मंत्रिपरिषद से उसकी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने के लिए केवल एक बार अपेक्षा कर सकता है, और पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है।
- 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संज्ञान से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर संघ के प्रशासन तथा विधान के प्रस्तावों से संबंधित कोई भी जानकारी प्रधानमंत्री को उपलब्ध करानी ही होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति एक इकाई के रूप में उत्तरदायी है। यदि किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है (जो कि वैसे भी केवल लोकसभा में पूरी मंत्रिपरिषद के विरुद्ध ही लाया जा सकता है, व्यक्तिगत मंत्री के विरुद्ध नहीं), तो यह पूरी सरकार की नीति या कार्य के विरुद्ध माना जाता है और संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है। हालाँकि, व्यक्तिगत रूप से मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं (अनुच्छेद 75(2))। कथन 2 सही है; 44वें संविधान संशोधन 1978 के माध्यम से यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य होता है। कथन 3 पूरी तरह सही है, अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के कर्तव्यों को परिभाषित करता है जिसके तहत संघ के प्रशासन और विधान प्रस्तावों की जानकारी राष्ट्रपति को देना अनिवार्य है। भारतीय संविधान के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, उनकी शक्तियों तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि वह सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित (Qualified) हो, तथा उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होने के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार होता है, किंतु उसे किसी भी मामले में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा CAG अपने पद पर छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) बने रहते हैं।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) केंद्र सरकार के लेखाओं से संबंधित अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, जबकि किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित उसकी रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को सौंपी जाती है ताकि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल में प्रस्तुत की जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राजभाषा आयोग का गठन किस अनुच्छेद के तहत किया जाता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना, उन पर बहस करना तथा ऐसे विषयों से संबंधित सलाह देना है जिनमें राज्यों या संघ और एक या अधिक राज्यों की समान रुचि हो।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है, और इसके निर्णयों या अनुशंसाओं की प्रकृति न्यायालयों के निर्णयों की तरह राज्यों और केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती है।
3. सरकारीिया आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिश के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ शासित प्रदेशों के प्रशासक शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है तथा वह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोल सकता है और भाग ले सकता है, किंतु उसे संसद की संयुक्त बैठक में मत देने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त होता है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
3. CAG अपने पद पर न तो भारत सरकार के अधीन और न ही किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या रोजगार का पात्र होता है, जबकि महान्यायवादी को निजी वकालत करने से संविधान द्वारा पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है और वह सरकार का पूर्णकालिक सेवक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'अखिल भारतीय सेवाओं' का गठन वर्णित है?
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