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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) की प्रकृति, उनके कानूनी दायरे और उनके वैधानिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूल कर्तव्यों को संविधान के भाग IV-क के अनुच्छेद 51-क में शामिल किया गया है, और ये कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं।
- 2. स्वर्ण सिंह समिति ने अपनी अनुशंसा में केवल 8 मूल कर्तव्यों को जोड़े जाने का सुझाव दिया था और साथ ही यह संस्तुति भी की थी कि मूल कर्तव्यों का पालन न करने पर संसद को दंड या अर्थदंड का प्रावधान करने की विधायी शक्ति होनी चाहिए, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार कर लिया था।
- 3. यद्यपि मूल कर्तव्य प्रकृति से गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, फिर भी संसद को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधि निर्माण के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम जैसे कानूनों के जरिए इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से प्रवर्तनीय (Enforceable) बना सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत अनुच्छेद 51-क में समाहित मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही आबद्ध हैं, विदेशी नागरिकों पर इनकी कोई बाध्यता नहीं है। कथन 2 असत्य है क्योंकि स्वर्ण सिंह समिति ने कुल 8 मूल कर्तव्यों को जोड़े जाने की सिफारिश की थी और यह भी सुझाव दिया था कि इनके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान किया जाए, किंतु इंदिरा गांधी सरकार ने 42वें संविधान संशोधन, 1976 के समय मूल कर्तव्यों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी थी और दंड के प्रावधान वाले सुझाव को संविधान संशोधन अधिनियम में शामिल नहीं किया था। कथन 3 सही है क्योंकि यद्यपि मूल कर्तव्य सीधे तौर पर गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, किंतु संसद समय-समय पर विभिन्न कानूनों जैसे 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972', 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' और 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' के माध्यम से इन्हें विधिक बल प्रदान करती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ें।
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भारतीय संविधान सभा के गठन और इसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और रियाسतों दोनों के प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से ही चुना गया था।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग लिया था, तथा डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
3. संविधान सभा द्वारा अपने कार्यों के संचालन के लिए कुल 22 से अधिक समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंबेडकर थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, दलबदल विरोधी कानून और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा सरकारी प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (जैसे 1, 2, 3...) होगा, किंतु संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 1965 के बाद भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है।
2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों द्वारा बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' दोनों भाषाओं को शामिल किया गया है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के अपवाद के रूप में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) हो जाता है, तो उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य विलय के पक्ष में हैं, तो वे अयोग्यता से सुरक्षित रहेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (विशेषकर 42वें, 44वें और राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान किए गए प्रावधानों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान जोड़ा गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल संपूर्ण देश में कर सकता है, और मंत्रिपरिषद के मौखिक अनुरोध पर ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जा सकती है।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) का ऐसा विनिश्चय लिखित रूप में उसे संसूचित किया जाए, तथा आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा एक माह के भीतर विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित एवं मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
3. आंतरिक अशांति (Internal Disturbance) शब्द को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद 352 से पूर्णतः हटा दिया गया और उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, जिसके तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) की स्वतंत्रता, उनके सदस्यों की सेवा शर्तों तथा उनके क्षेत्राधिकार के विस्तार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 318 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होती है, किंतु आयोग के किसी सदस्य की नियुक्ति के पश्चात उसकी सेवा शर्तों में उसके अहित में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग को संघ या राज्य के अधीन किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority), निगम या अन्य निक, या किसी स्थानीय निकाय के कृत्यों को अपने हाथ में लेने का अधिकार प्रदान कर सकता है।
3. अनुच्छेद 323 के प्रावधानों के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग अपने द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, किंतु यदि रिपोर्ट में आयोग की किसी सलाह को सरकार द्वारा अस्वीकार किए जाने के कारण दिए गए हैं, तो उस अस्वीकृति के कारणों को संसद के समक्ष रखना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का कार्यकाल कितना होता है?
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