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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में यह प्रतीत हो कि ऐसी परिषद की स्थापना से जनहित साधित होगा, तो वह अंतर-राज्यीय परिषद की स्थापना कर सकता है और इस परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच विवादों की जांच करना और उन पर सलाह देना है, जिसमें न्यायीय निर्णय (Adjudication) देने की शक्ति भी शामिल है।
- 2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission - 1983) ने अपनी संस्तुति में यह सिफारिश की थी कि अनुच्छेद 263 के अंतर्गत स्थापित होने वाली अंतर-राज्यीय परिषद एक स्थायी निकाय (Permanent body) होनी चाहिए और इसका नाम 'अंतर-सरकार परिषद' (Inter-Governmental Council) होना चाहिए।
- 3. अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर विधि बनाए, तो संसद संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवर्तन में रहता है।
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतर-राज्यीय परिषद एक संसूचकीय, विमर्शकारी और परामर्शदात्री (Advisory) निकाय है, जिसे राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच और सलाह देने का अधिकार तो है, परंतु इसे किसी भी प्रकार की न्यायीय निर्णय (Adjudication) देने की शक्ति प्राप्त नहीं है। अनुच्छेद 262 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय जल विवादों के लिए संसद विधि द्वारा अलग से अधिकरण (Tribunal) का गठन करती है, जिसके निर्णयों से सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता भी वर्जित होती है। कथन 2 सत्य है; सरकारी आयोग (1983) ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुधारने के लिए यह प्रमुख संस्तुति दी थी कि अनुच्छेद 263 के तहत एक स्थायी 'अंतर-सरकार परिषद' की स्थापना की जानी चाहिए ताकि राज्यों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग बना रहे। इसी संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से अंतर-राज्यीय परिषद का गठन किया गया था। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्य सभा के प्रस्ताव द्वारा संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की जो शक्ति मिलती है, वह संकल्प अधिकतम **एक वर्ष** की अवधि के लिए प्रवर्तन में रहता है (यद्यपि इसे इस प्रकार के नए संकल्पों द्वारा बार-बार आगे बढ़ाया जा सकता है, किंतु एक बार में इसकी अवधि अधिकतम एक वर्ष होती है)। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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लोक सेवा आयोग के सदस्यों को हटाने का अधिकार किसे है?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त महान्यायवादी को भारत सरकार के विधि अधिकारी के रूप में देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु विधायी मामलों में उसे किसी भी स्थिति में निर्णायक मत (Casting Vote) देने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन (Address) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, न कि राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत।
3. CAG द्वारा तैयार किए गए संघ के लेखा परीक्षण प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाता है, जिसके पश्चात संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) उन प्रतिवेदनों की संवीक्षा करती है, जबकि राज्य के लेखा परीक्षण प्रतिवेदन संबंधित राज्यपाल को सौंपे जाते हैं जो उन्हें राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह उपबंधित किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा संपूर्ण भारत देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग में एक साथ लागू की जा सकती है, तथा देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग आधारों पर एक साथ एकाधिक उद्घोषणाएँ भी प्रख्यापित की जा सकती हैं।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर ही की जा सकती है, तथा मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति (Written Recommendation) प्राप्त होने के पश्चात् ही राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा कर सकता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा करने वाले अनुमोदन प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसकी घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, जिसे बाद में 44वें संशोधन द्वारा दो महीने से घटाकर एक महीना किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1-4) के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत' अर्थात 'इंडिया' राज्यों का संघ (Union of States) होगा, न कि राज्यों का फेडरेशन (Federation of States), क्योंकि यह व्यवस्था इस तथ्य को दर्शाती है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच हुए किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का कोई अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमा या नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास भेजा गया विचार या मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होता है, भले ही राज्य विधानमंडल ने निश्चित समयावधि के भीतर अपना मत प्रेषित कर दिया हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबाड़ी यूनियन वाद' (1960) में दिए गए परामर्श के विपरीत, वर्ष 1969 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक अन्य निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of Territory) के लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कार्यपालिका के कार्यकारी आदेश (Executive Action) द्वारा ही संपन्न किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
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