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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार, 1 जुलाई 1948 के पश्चात पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले व्यक्ति को भारत का नागरिक तभी पंजीकृत किया जा सकता है जब वह कम से कम छह मास तक भारत के राज्यक्षेत्र में निवास कर चुका हो और उसने निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष आवेदन किया हो।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारत में 'देशीकरण' (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक कम से कम पिछले 14 वर्षों से भारत में रह रहा हो या केंद्र सरकार की सेवा में हो, तथा आवेदन करने से ठीक पूर्व के 12 महीनों की निरंतर अवधि के दौरान भी भारत में निवास कर रहा हो।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 9 के अंतर्गत यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह स्वतः समाप्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विशेष कानून या कार्यपालिका के औपचारिक आदेश के बिना वैध नहीं मानी जाएगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत पाकिस्तान से भारत प्रव्रजन करने वाले व्यक्तियों के नागरिकता संबंधी प्रावधान दिए गए हैं। इसके खंड (b) के उप-खंड (ii) के अनुसार, 1 जुलाई 1948 के पश्चात पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्ति को भारत का नागरिक पंजीकृत किया जा सकता है, बशर्ते उसने पंजीकरण के लिए आवेदन करने से ठीक पूर्व कम से कम छह महीने तक भारत के राज्यक्षेत्र में निवास किया हो।

कथन 2 सही है: नागरिकता अधिनियम, 1955 की तीसरी अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार, देशीकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता के लिए यह शर्त है कि आवेदक भारत सरकार की सेवा में हो या आवेदन करने से ठीक पहले के 12 महीनों से लगातार भारत में रह रहा हो, और उन 12 महीनों से ठीक पहले के 14 वर्षों की कुल अवधि में से कम से कम 11 वर्ष भारत में रहा हो (यद्यपि कुछ विशेष मामलों में इस अवधि को संशोधित किया गया है)।

कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः (ipso facto) समाप्त हो जाती है। इस समाप्ति के लिए संसद के किसी नए कानून या कार्यपालिका के औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं होती है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल।
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