BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
20 views

भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार' (अनुच्छेद 29 और 30) तथा संवैधानिक उपचारों के अधिकार (अनुच्छेद 32) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 29(1) भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी भी वर्ग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार प्रदान करता है, और यह सुरक्षा का अधिकार केवल अल्पसंख्यक (Minority) वर्गों तक ही सीमित न होकर बहुसंख्यक वर्ग के नागरिकों के लिए भी उपलब्ध है।
  2. 2. अनुच्छेद 30(1) के अंतर्गत सभी अल्पसंख्यकों को, चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर, अपनी रुचि की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार प्रदान किया गया है, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि यदि राज्य ऐसी अल्पसंख्यक संस्थाओं की संपत्ति का अनिवार्य अधिग्रहण करता है, तो वह ऐसा बाजार मूल्य से कम प्रतिकार (Compensation) देकर नहीं कर सकता।
  3. 3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार क्षेत्र केवल मूल अधिकारों के हनन तक ही सीमित है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों (Legal Rights) के उल्लंघन के मामलों में भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अनुच्छेद 29(1) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के वर्ग को, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार देता है। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, इस अनुच्छेद में प्रयुक्त 'नागरिकों के किसी भी वर्ग' शब्दावली में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों वर्ग शामिल हैं। कथन 2 गलत है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 30 में यह प्रावधान जोड़ा गया था कि अल्पसंख्यकों की शैक्षणिक संस्थाओं की संपत्ति के अनिवार्य अर्जन के लिए राज्य द्वारा निर्धारित प्रतिकार (Compensation) राशि ऐसी होनी चाहिए जिससे उस अधिकार का हनन या निर्बंधन न हो (यह संशोधन विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए था), किंतु मूल संविधान या इसके बाद के संशोधनों में 'बाजार मूल्य से कम प्रतिकार न देने' की ऐसी कोई कठोर सीमा अनुच्छेद 30 में नहीं जोड़ी गई, बल्कि 44वें संशोधन ने संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों (अनुच्छेद 31) की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार (अनुच्छेद 300A) बना दिया था। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है (इसकी अधिकारिता इस मामले में सीमित है), जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय (High Court) मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी यानी सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों को पढ़ें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकारों और उनके अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए जाने वाले युक्तियुक्त निर्बंधों (Reasonable Restrictions) के आधारों में 'भारत की संप्रभुता और अखंडता', 'राज्य की सुरक्षा' और 'विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध' शामिल हैं, किंतु 'सार्वजनिक व्यवस्था' (Public Order) मूल संविधान में नहीं था, जिसे प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था। 2. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत दिए गए 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' के दायरे में निजता का अधिकार (Right to Privacy) एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने 'के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ' बाद में सर्वसम्मति से अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अंतर्गत एक स्वतंत्र मौलिक अधिकार घोषित किया था। 3. अनुच्छेद 22 के तहत निवारक नजरबंदी (Preventive Detention) के अधीन किसी व्यक्ति को बिना किसी न्यायिक परीक्षण के अधिकतम तीन महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, और यदि इस अवधि से अधिक समय तक हिरासत में रखना आवश्यक हो, तो इसके लिए किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड (Advisory Board) का प्रतिवेदन प्राप्त होना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन और नगरपालिकाओं के वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा जो नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा, और यह आयोग राज्य की संचित निधि से नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों के निर्धारण के लिए सिद्धांतों की संस्तुति करता है। 2. अनुच्छेद 243-ZE के तहत प्रत्येक राज्य में एक जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो जिले के लिए विकास योजनाएं तैयार करेगी, तथा इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-तिहाई (3/4) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं। 3. अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल विधि द्वारा नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जिससे वे ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व संभाल सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोक हित के किसी विषय पर राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् के निर्णयों की प्रकृति राज्यों तथा केंद्र पर पूर्णतः बाध्यकारी होती है। 2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा एक स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया गया, जिसकी बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। 3. इस परिषद् की संरचना में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संघ राज्य क्षेत्रों (जहाँ विधानसभाएँ हैं) के मुख्यमंत्री, तथा राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के राज्यपाल या प्रशासक इसके सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → राज्यसभा के एक सदस्य का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है? → भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 7 के अनुसार, जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के पश्चात भारत से पाकिस्तान के लिए प्र्रव्रजन (Migrated) कर गया था, वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा, भले ही वह बाद में भारत में पुनर्वास के अनुज्ञापत्र (Permit) के आधार पर वापस लौट आए। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'पंजीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Registration) प्राप्त करने के लिए भारत में सामान्य निवास की पूर्ववर्ती शर्त के रूप में आवेदन से ठीक पहले कम से कम 7 वर्षों तक निरंतर भारत में निवास करना अनिवार्य कर दिया गया है। 3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 8 के अपवादों को छोड़कर स्वतः समाप्त हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.