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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) के पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार सीधे संविधान में निहित है, जिसके लिए उन्हें किसी राजनयिक या कौंसलिया (Consular) अधिकारी के समक्ष आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 में वर्ष 2019 में किए गए संशोधन (CAA, 2019) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए विशेष उपबंध किए गए हैं, तथा इस अधिनियम के दायरे से संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को पूरी तरह बाहर रखा गया है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 11 के अंतर्गत संसद को नागरिकता के अर्جين और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान की गई है, और इस शक्ति का प्रयोग केवल संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) के माध्यम से ही किया जा सकता है, साधारण विधि द्वारा नहीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 8 के तहत भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) को नागरिकता तभी मिल सकती है जब वे भारत के उस देश में स्थित राजनयिक या कौंसलिया (Consular) अधिकारी के समक्ष आवेदन करें। कथन 2 सत्य है; नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उन छह अल्पसंख्यकों को नागरिकता का मार्ग प्रदान किया गया है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, और इसमें संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले आदिवासी क्षेत्रों (असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा) तथा 'इनर लाइन परमिट' (ILP) वाले क्षेत्रों को छूट दी गई है। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 11 के तहत संसद साधारण बहुमत द्वारा नागरिकता कानून बना सकती है, इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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