BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
24 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडलों की विधाई शक्तियों, धन विधेयकों (Money Bills) की प्रक्रिया तथा विधानसभा और विधान परिषद के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधानसभा द्वारा कोई साधारण विधेयक पारित करके विधान परिषद को भेजा जाता है, और विधान परिषद उस विधेयक को बिना पारित किए तीन महीने तक रोक लेती है या उसमें ऐसे संशोधन करती है जिनसे विधानसभा सहमत नहीं है, तो विधानसभा उस विधेयक को पुनः पारित कर सकती है और विधान परिषद के पास अधिकतम चार महीने (प्रथम बार के 3 महीने और द्वितीय बार के 1 महीने को मिलाकर) का कुल विलंबकारी अधिकार होता है।
  2. 2. धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 198 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि धन विधेयक केवल विधानसभा में ही पुनरस्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधान परिषद को किसी धन विधेयक को प्राप्ति की तिथि से अधिकतम चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के विधानसभा को लौटाना होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित समझा जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
  3. 3. विधान परिषद के पास किसी साधारण विधेयक पर विचार करने के दौरान उसे अस्वीकार करने की पूर्ण शक्ति होती है, और दोनों सदनों के बीच गतिरोध (Deadlock) की स्थिति को सुलझाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों की तर्ज पर राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद के पास प्रथम बार में 3 महीने और द्वितीय बार में 1 महीने यानी कुल मिलाकर अधिकतम 4 महीने का विलंबकारी (Delaying) अधिकार नहीं होता है। विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को प्रथम बार में अधिकतम 3 महीने तक और विधानसभा द्वारा दोबारा पारित करने पर अधिकतम 1 महीने तक रोक सकती है, यानी कुल मिलाकर अधिकतम 3 महीने (प्रथम बार 3 महीने + द्वितीय बार 1 महीने नहीं, बल्कि विधानसभा द्वारा पुनः पारित किए जाने पर उसे 1 माह का अतिरिक्त समय मिलता है, जिससे कुल अवधि 4 महीने नहीं बल्कि पहली बार 3 महीने और दूसरी बार 1 महीना यानी कुल मिलाकर विधान परिषद कुल 4 महीने तक विचार रोक सकती है, यह कथन तकनीकी रूप से सही है; किंतु रुकिए - विधान परिषद प्रथम बार में विधेयक को 3 महीने तक रोक सकती है और दूसरी बार में 1 महीने तक, यानी कुल मिलाकर वह 4 महीने तक विलंब कर सकती है। अतः कथन 1 सही है? नहीं, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीने तक रोक सकती है, कुल मिलाकर 4 महीने का समय मिलता है। आइए तीसरे कथन को देखते हैं)। कथन 3 असत्य है क्योंकि भारतीय संविधान में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए **संयुक्त बैठक (Joint Sitting)** का **कोई प्रावधान नहीं है**। संसद के संदर्भ में अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक बुलाई जाती है, लेकिन राज्य स्तर पर विधानसभा की स्थिति सर्वोपरि होती है और विधान परिषद केवल एक उच्च सदन के रूप में विलंबकारी भूमिका निभाती है। कथन 2 बिल्कुल सही है, क्योंकि धन विधेयक केवल विधानसभा में पेश होता है और विधान परिषद इसे केवल 14 दिन रोक सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विस्तृत अध्ययन करें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) का निर्णय उसे लिखित रूप में संसूचित किया गया हो। 2. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायपालिका की समीक्षा (Judicial Review) से पूरी तरह से बाहर कर दिया गया था, किंतु बाद में 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा इस व्यवस्था को पलट दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि आपातकाल की घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए अलग से किसी राष्ट्रपति के आदेश की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही आपातकाल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर लगाया गया हो या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किस अनुच्छेद के तहत और कितने वर्षों में होता है? → संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान करता है? → भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान का हिस्सा नहीं बनाया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में अनुच्छेद 51क के तहत कुल 11 मूल कर्तव्य नागरिकों पर आरोपित हैं। 2. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और प्रकृति से ये सभी कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन या अनुपालन न किए जाने की स्थिति में न्यायालय द्वारा सीधे रिट याचिका के माध्यम से इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है। 3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत छह से चौदh वर्ष की आयु के बीच के अपने बालक या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य प्रत्येक ऐसे माता-पिता या संरक्षक का होगा जो स्वयं इस आयु वर्ग में साक्षरता प्राप्त कर चुके हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'संविधान संशोधन' की प्रक्रिया में संसद की शक्ति बताता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.