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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध' (अनुच्छेद 15) और 'समानता का अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 15(4) को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, जिसके तहत राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए अथवा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई है।
- 2. अनुच्छेद 16(4-A) के माध्यम سے राज्य को किसी भी वर्ग के नागरिकों के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त नहीं है, पदोन्नति के मामलों में आरक्षण के लिए उपबंध करने की शक्ति दी गई है, और यह संसद को 77वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1995 द्वारा प्राप्त हुई।
- 3. अनुच्छेद 18 के अंतर्गत उपाधियों का अंत किया गया है, जिसके तहत राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय कोई अन्य उपाधि प्रदान नहीं कर सकता है, तथा भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा अनुच्छेद 15(4) को जोड़ा गया, जो राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों, एससी और एसटी के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है। कथन 2 सही है: 77वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1995 द्वारा अनुच्छेद 16(4-A) जोड़ा गया, जो राज्य के अधीन सेवाओं में एससी और एसटी के लिए पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 18 के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी राज्य से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना कोई उपाधि स्वीकार **नहीं** कर सकता है। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय संविधान के 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, नए राज्यों का संघ में प्रवेश या उनकी स्थापना कर सके, जो कि केवल उन विदेशी क्षेत्रों पर लागू होती है जो पहले से भारत का हिस्सा नहीं थे।
2. अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, बशर्ते राष्ट्रपति उस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजें और राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय संसद के लिए सर्वथा बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 4 के यह स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश/स्थापना तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की जा सकती थी, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़कर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया था।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है, तथा अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 को छोड़कर अन्य किसी भी मूल अधिकार के प्रवर्तन के लिए न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति में राज्य विधानमंडल की शक्तियां संसद द्वारा प्रयोग की जाती हैं, और 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रपति शासन की अवधि को एक वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि उस समय पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित करे कि उस राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना असंभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, उनकी योग्यताओं, शक्तियों और कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसके पास योग्यता वह होनी चाहिए जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की होती है, तथा उसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने या उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार तो है परंतु मत देने (Voting) का कोई अधिकार नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपनी पदमुक्ति के पश्चात् भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद (Office of Profit) धारण करने का पात्र नहीं होता है, जबकि महान्यायवादी के संदर्भ में संविधान में ऐसा कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है कि वह निजी प्रैक्टिस या अन्य सरकारी पद धारण नहीं कर सकता है, बशर्ते वह सरकार के हितों के प्रतिकूल न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत का राष्ट्रपति त्यागपत्र किसे देता है?
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ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास के प्रारंभिक दौर में लाए गए 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के अंतर्गत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई थी जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया; इसके तहत राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई, जबकि व्यापारिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) को बनाए रखा गया, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' (Double Government) की शुरुआत हुई।
3. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी को बंगाल प्रेसीडेंसी के पूर्णतः अधीन कर दिया गया, जिससे गवर्नर-जनरल को तीनों प्रेसीडेंसी के युद्ध, राजस्व और कूटनीति से संबंधित मामलों में अनन्य एवं सर्वोपरि नियंत्रण प्राप्त हो गया, और स्थानीय प्रेसीडेंसी गवर्नर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के अधिकार से वंचित हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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