त्वरित लिंक्स
Indian Polity
1 views
भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 14 न केवल 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) की गारंटी देता है, जो कि एक ब्रिटिश मूल की नकारात्मक अवधारणा है, बल्कि यह 'विधियों के समान संरक्षण' (Equal Protection of Laws) का भी उपबंध करता है, जिसे अमेरिकी संविधान से लिया गया है और यह एक सकारात्मक अवधारणा है जो तार्किक वर्गीकरण की अनुमति देती है।
- 2. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) के विरुद्ध संरक्षण केवल उसी स्थिति में प्राप्त होता है जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए एक ही बार अभियोजित और दंडित किया गया हो, और यह सुरक्षा भारतीय न्यायालयों के साथ-साथ विदेशी न्यायालयों या विभागीय (Departmental) प्राधिकरणों द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी समान रूप से लागू होती है।
- 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के संरक्षण का अधिकार न केवल नागरिकों को बल्कि विदेशियों को भी उपलब्ध है, और मेनका गांधी वाद (1978) के पश्चात उच्चतम न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure established by law) के स्थान पर 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due process of law) के अमेरिकी सिद्धांत को समाहित करते हुए इसके दायरे में कई अन्य अधिकार भी जोड़े हैं।
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 14 में निहित 'विधि के समक्ष समता' ब्रिटेन से ली गई एक नकारात्मक अवधारणा है (जिसका अर्थ है किसी भी व्यक्ति के पक्ष में विशिष्ट विशेषाधिकारों का अभाव), जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' अमेरिका से प्रेरित एक सकारात्मक अवधारणा है जो समान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ समान व्यवहार और असमान लोगों के साथ असमान व्यवहार (तार्किक वर्गीकरण) की अनुमति देती है। कथन 2 गलत है: 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) के विरुद्ध संरक्षण (अनुच्छेद 20(2)) केवल तभी प्राप्त होता है जब व्यक्ति को किसी अपराध के लिए न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Court of Law or Judicial Tribunal) के समक्ष अभियोजित और दंडित किया गया हो। यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकरणों द्वारा दिए गए दंड या विदेशी न्यायालयों के निर्णयों पर लागू नहीं होता है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 21 के तहत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार नागरिकों और विदेशियों दोनों को प्राप्त है। मेनका गांधी वाद (1978) के बाद, उच्चतम न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की पारंपरिक व्याख्या का विस्तार करते हुए 'विधि की उचित प्रक्रिया' के तत्वों को शामिल किया है, जिससे इसके अंतर्गत कई मानवीय अधिकार स्वतः सम्मिलित हो गए हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए विजिट करें: भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था।
Related Questions
→
वर्तमान में भारतीय संविधान में कुल कितनी अनुसूचियाँ (Schedules) हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों के साथ-साथ अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद् द्वारा दिए गए सभी निर्णय या संस्तुतियाँ केंद्र सरकार तथा सभी संबंधित राज्यों के लिए पूर्ण रूप से विधिक रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) होती हैं।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् के गठन की संस्तुति सर्वप्रथम सरकारी आयोग (Sarkaria Commission, 1983-88) द्वारा की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा इसे एक स्थायी संवैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया।
3. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) भी एक प्रकार का सांविधिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान के सिद्धांतों पर राष्ट्रपति को संस्तुतियां देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (Regulating and Charter Acts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी जिसमें मुख्य न्यायाधीश सहित कुल चार न्यायाधीश थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई जो कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी मामलों की देखरेख करता था, और इस प्रकार द्वैध शासन प्रणाली (Double Government) की शुरुआत हुई।
3. चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश की शासन प्रणाली में पहली बार 'खुली प्रतियोगिता प्रणाली' (Open Competition System) के आधार पर सिविल सेवकों के चयन का प्रयास किया गया, जिसे निदेशक बोर्ड (Court of Directors) के कड़े विरोध के कारण तुरंत लागू कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
→
अनुच्छेद 356 कब लगता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.