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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) अनुच्छेद 6 के अंतर्गत पाकिस्तान से भारत प्रवासन करने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के अर्जन की व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत 1 जुलाई 1948 से पूर्व भारत आने वाले व्यक्तियों को स्वतः नागरिकता मिल जाती थी, जबकि उस तिथि के पश्चात आने वाले व्यक्तियों को छह महीने तक भारत में निवास करने के बाद निर्धारित अधिकारी के समक्ष पंजीकरण कराना अनिवार्य था।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'वंश द्वारा नागरिकता' (By Descent) के मूल प्रावधान के अनुसार 26 जनवरी 1950 के बाद या उसके पश्चात भारत से बाहर जन्मा व्यक्ति भारत का नागरिक तभी हो सकता था जब उसके जन्म के समय उसके पिता भारत सरकार के अधीन सेवा में हों, और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1992 द्वारा इस प्रावधान में संशोधन कर 'माता या पिता' दोनों में से किसी एक के भारतीय होने को आधार बनाया गया।
  3. 3. अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद द्वारा वर्ष 2019 में पारित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पूर्व भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) की परिभाषा से छूट प्रदान की गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार पाकिस्तान से भारत प्रवासन करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता के लिए 'कट-ऑफ डेट' 1 जुलाई 1948 निर्धारित की गई थी। इस तिथि से पहले आने वाले व्यक्ति स्वचालित रूप से नागरिक बन गए, जबकि इसके बाद आने वालों को 6 माह के निवास के बाद पंजीकृत होना आवश्यक था। कथन 2 सही है: मूल नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'वंश द्वारा नागरिकता' के लिए केवल पिता का भारतीय होना आवश्यक था, जिसे 1992 के संशोधन द्वारा 'माता अथवा पिता में से किसी एक' के भारतीय होने पर संशोधित किया गया। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने की शक्ति देता है। सीएए (CAA) 2019 ने उपर्युक्त तीन देशों के छह अल्पसंख्यकों को अवैध प्रवासी की श्रेणी से छूट दी है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग लिया था, और इस बैठक में अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया था, जो फ्रांस की परंपरा पर आधारित था। 2. उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसे सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था, और यही प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। 3. संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख और गौण समितियों का गठन किया गया था, जिनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी, जिसने संविधान का अंतिम प्रारूप तैयार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह बाध्य किया गया कि वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा, तथा इसी संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को केवल तभी निलंबित किया जा सकता है जब आपातकाल 'युद्ध या बाह्य आक्रमण' के आधार पर घोषित किया गया हो, न कि 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित निर्णय के आधार पर ही की जा सकती है। 3. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' के उपबंधों तथा नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, जो व्यक्ति भारत से बाहर किसी देश में रहता है या जिसके माता-पिता में से कोई भारत शासन अधिनियम, 1935 या संविधान के प्रारंभ से पूर्व भारत में जन्मा था, वह भारत का नागरिक माना जा सकता है, बशर्ते उसने भारत के बाहर के देश की नागरिकता स्वेच्छा से प्राप्त न की हो और उसने भारत के राजनयिक या कौंसलिया प्रतिनिधि के पास नागरिकता के लिए पंजीकरण (Registration) आवेदन न किया हो। 2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के माध्यम से अधिनियम, 1955 में संशोधन करके पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पूर्व भारत में आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को 'अवैध प्रवासी' (Illegal Migrant) की परिभाषा से छूट प्रदान की गई है, तथा उनके लिए प्राकृतिक रूप से देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्ति हेतु आवश्यक निवास की अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। 3. संविधान के अनुच्छेद 10 के तहत प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का हकदार बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद के पास विधि निर्माण के माध्यम से नागरिकता के अधिकारों को विनियमित या समाप्त करने की पूर्ण शक्ति है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा पारित 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objective Resolution) ही अंततः भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को मूल संविधान में ही शामिल कर लिया गया था। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचे। 3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह प्रकृति से गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को देश के किसी भी न्यायालय में प्रवर्तित (Enforced) नहीं कराया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत का संविधान 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) है, यह किसने कहा था?
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