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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का क्षेत्र, उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है।
- 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से सेवारत न हो।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (जिनमें जिला न्यायालय और उनके नीचे के अन्य न्यायालय शामिल हैं) पर नियंत्रण, जिसमें पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से जुड़े मामले शामिल हैं, पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और उच्च न्यायालय की इसमें केवल परामर्शदात्री भूमिका होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकते हैं, जबकि अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है तथा उसके लिए सात वर्ष का वकालत का अनुभव आवश्यक है और वह केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में पहले से न हो। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (नियंत्रण की शक्ति, posting, promotion आदि) का अधिकार संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, न कि राज्यपाल में। भारतीय संविधान के इन अनुच्छेदों के बारे में विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' (Regulating Act of 1773) के प्रावधानों और उसके क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा बंगाल के गवर्नर के पद को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' में परिवर्तित किया गया, तथा लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स को इस पद पर नियुक्त करने के साथ-साथ उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद (Executive Council) का गठन किया गया, जिसके निर्णय बहुमत के आधार पर होते थे और गवर्नर-जनरल को केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत (Casting Vote) का अधिकार था।
2. इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश सरकार का पहली बार कंपनी पर नियंत्रण स्थापित हुआ, जिसके तहत 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (कंपनी की संचालक समिति) को यह अनिवार्य किया गया कि वे भारत के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी सभी मामलों की पूरी जानकारी ब्रिटिश सरकार (राजस्व सचिव) को दें।
3. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता के फोर्ट विलियम में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, और इस न्यायालय को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के सभी ब्रिटिश विषयों के लिए दीवानी, फौजदारी, admiralty और धार्मिक मामलों में प्रारंभिक और अपीलीय अधिकारिता प्रदान की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और उनके प्रवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान में मूल कर्तव्यों को शामिल करने की अनुशंसा स्वर्ण सिंह समिति द्वारा की गई थी, जिसने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में जोड़ने की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
2. अनुच्छेद 51क के तहत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे तथा उसे अक्षुण्ण रखे, और यह विशिष्ट कर्तव्य संविधान द्वारा केवल भारतीय नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि भारत में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होता है।
3. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने कुछ मूल कर्तव्यों के कानूनी प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, और यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, अर्थात् इनके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय से प्रवर्तन कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, उनके क्षेत्राधिकार, स्वायत्तता तथा वार्षिक प्रतिवेदनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के खंड (3) के अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि सिविल सेवाओं में नियुक्तियों के लिए और सिविल सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती की पद्धतियों से संबंधित सभी विषयों पर संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा, किंतु यदि आयोग के परामर्श के विरुद्ध सरकार कोई निर्णय लेती है, तो उस परामर्श की अवहेलना करने के कारणों को सदन के समक्ष रखना अनिवार्य नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 321 के अनुसार, संसद या राज्य का विधानमंडल, क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे का विस्तार करके उन्हें किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या अन्य लोक निकाय (Public Institution) के अधीन आने वाली सेवाओं की नियुक्तियों से संबंधित मामलों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल करने के लिए विधि बना सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 323 के प्रावधानों के तहत संघ लोक सेवा आयोग प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति को अपने द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, और राष्ट्रपति उस रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जिसमें उन मामलों का विवरण भी शामिल होता है जिनमें आयोग के परामर्श को स्वीकार नहीं किया गया था और उसके कारण क्या थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) के गठन का प्रावधान किया गया है, और इसकी स्थापना सर्वप्रथम किस वर्ष की गई थी?
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वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद?
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