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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित ऐतिहासिक संदर्भों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के भू-भाग को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक के संबंध में संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार (View) राष्ट्रपति या संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को प्राप्त 'क्षेत्र में परिवर्तन करने की शक्ति' में किसी भारतीय भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपना (Cession) भी शामिल है, और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि इसे साधारण बहुमत से ही पारित किया जा सकता है।
- 3. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए 100वें संविधान संशोधन अधिनियम (2015) के माध्यम से कुछ अंतःक्षेत्रों (Enclaves) का आदान-प्रदान किया गया, क्योंकि किसी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि अनुच्छेद 3 इसके दायरे में नहीं आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 3 के तहत जब राष्ट्रपति किसी राज्य के विधानमंडल के पास पुनर्गठन से संबंधित विधेयक भेजते हैं, तो राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई सलाह या विचार को मानना संसद या राष्ट्रपति के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी नहीं होता है। वे उसे स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने की शक्ति प्राप्त नहीं है, और इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम (अनुच्छेद 368 के अधीन) पारित करना आवश्यक है। कथन 3 सत्य है; भारत और बांग्लादेश के बीच हुए भूमि सीमा समझौते को प्रभावी बनाने के लिए संसद को 100वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 पारित करना पड़ा था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सकेगी जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी मौजूदा राज्य के क्षेत्र में परिवर्तन, उसकी सीमाओं या नाम बदलने की शक्ति प्रदान करता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या उसके क्षेत्रफल व नाम में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बाद ही संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, और राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
3. 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए परामर्श के उपरांत, भारत के किसी भू-भाग को किसी अन्य विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से विधि बनाना पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम (अनुच्छेद 368) की आवश्यकता को अनिवार्य कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि भारत का कोई नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में संसद या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा किसी औपचारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं होती है।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के तहत 'प्राकृतिक रूप से नागरिकता' (Citizenship by Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक व्यक्ति कम से कम पिछले 12 वर्षों से भारत में निवास कर रहा हो या केंद्र सरकार की सेवा में हो, तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भाषाओं का उसे पर्याप्त ज्ञान हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 10 के अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति, जो भाग II के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए भी अपनी नागरिकता से कभी भी वंचित नहीं किया जा सकता है, भले ही संसद कोई नया कानून क्यों न पारित कर दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधान परिषद' के गठन, संरचना, और धन विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में इसकी कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है।
3. विधान परिषद के पास किसी साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने तक रोकने की शक्ति होती है, जबकि धन विधेयक के मामले में विधान परिषद के पास केवल 14 दिनों की देरी करने की शक्ति होती है, जिसके बाद वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, भले ही विधान परिषद ने उसे अस्वीकार क्यों न कर दिया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II के अंतर्गत 'नागरिकता' (अनुच्छेद 5-11) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उस स्थिति में लागू नहीं होता जब भारत में युद्ध की स्थिति चल रही हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) पारित किया था।
3. नागरिकता अधिनियम, 1955 में अब तक हुए संशोधनों (विशेषकर नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019) के पश्चात, अब भारत में जन्म से नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जन्म के समय माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संसद की प्राक्कलन समिति के सदस्यों का कार्यकाल?
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