BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
18 views

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास और नियंत्रण की दिशा में पारित विभिन्न अधिनियमों (Regulating Acts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर के पद को 'बंगाल के गवर्नर-जनरल' में परिवर्तित किया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई थी जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
  2. 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों (बोर्ड के नियंत्रण) के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई।
  3. 3. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में कंपनी के चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर, उसके सभी एकाधिकार (Monopoly) को समाप्त कर दिया गया, तथा साथ ही भारत में ईसाई मिशनरियों को आकर धर्म प्रचार करने की अनुमति प्रदान की गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के तहत बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया था (प्रथम गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स थे), किंतु कलकत्ता में स्थापित उच्चतम न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे, और इस अधिनियम में कार्यकारी परिषद में सदस्यों की संख्या चार थी। कथन 2 असत्य है क्योंकि पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) और राजनीतिक मामलों के नियंत्रण के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई थी, न कि इसके विपरीत जैसा कि कथन में उल्लिखित है। कथन 3 सत्य है, क्योंकि चार्टर अधिनियम, 1813 ने भारत के साथ व्यापार में कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया (किंतु चाय और चीन के व्यापार का एकाधिकार बना रहा) और ईसाई मिशनरियों को भारत में प्रवेश की अनुमति दी। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उस राज्य के लिए मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करना अनिवार्य नहीं है। 2. अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन की शक्ति सौंपी गई है, और इन विषयों पर विधि बनाने की शक्ति केवल संसद के पास निहित है। 3. अनुच्छेद 243-E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष का होता है, और यदि किसी पंचायत को समय से पूर्व विघटित कर दिया जाता है, तो विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है, बशर्ते पंचायत का शेष कार्यकाल छह मास से कम का न हो। 4. 73वें संविधान संशोधन के द्वारा प्रत्येक राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसका प्रमुख राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, और उसे उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → संविधान का रक्षक कौन? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण अधिकार तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित ऐसा अध्यादेश उसी प्रकार का बल और प्रभाव रखता है जैसा कि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम का होता है, किंतु इसके लिए राष्ट्रपति के निर्देशों की आवश्यकता कुछ विशेष मामलों (जैसे विधानमंडल में उसी विषय के विधेयक को प्रस्तुत करने पर रोक) में अनिवार्य होती है। 2. राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति स्वविवेकिए शक्ति नहीं है, बल्कि वह राज्य मंत्रिमंडल (जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है) की सलाह और सहायता से ही इस शक्ति का प्रयोग करता है, और यदि राज्यपाल का अध्यादेश राज्य विधानमंडल के पुनरारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है। 3. अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, किंतु झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों के लिए संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत जनजातीय कल्याण मंत्री का भारसाधक एक पृथক मंत्री नियुक्त किए जाने का संवैधानिक दायित्व राज्यपाल पर अनिवार्य रूप से आरोपित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों तथा आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकती है, और इसके साथ ही अनुच्छेद 358 व 359 के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को भी राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जा सकता है। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित निर्णय के बिना नहीं की जा सकती है। 3. 44वें संविधान संशोधन के द्वारा ही यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार केवल तभी स्वतः निलंबित होंगे जब आपातकाल का आधार 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' हो, न कि 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया है, जो अनुच्छेद 243-Q से 243-ZG तक विस्तृत है, और इसके तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं—नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम—के गठन का प्रावधान किया गया है, बशर्ते किसी संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत का गठन किया जाना अनिवार्य है। 2. इस अधिनियम के माध्यम से जोड़ी गई बारहवीं अनुसूची में कुल 29 विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं बनाने तथा कानून लागू करने की पूर्ण विधायी शक्ति सीधे संविधान द्वारा स्वतः प्रदान की गई है। 3. अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रत्येक ऐसे नगरपालिका क्षेत्र में, जिसकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, एक या अधिक वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.