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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 11 के अंतर्गत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इस शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1957 (Citizenship Act, 1957) को अधिनियमित किया था।
- 2. संविधान के प्रारंभ में (26 जनवरी 1950 को) अनुच्छेद 6 के प्रावधानों के तहत पाकिस्तान से भारत प्र्रव्रजन करने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के अर्जन की व्यवस्था की गई थी, जिसके अनुसार यदि वह व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में पैदा हुआ था, तो वह भारत का नागरिक बन सकता था, बशर्ते उसने 19 जुलाई 1948 से पहले प्र्रव्रजन किया हो और वह अपने प्र्रव्रजन की तिथि से सामान्यतः भारत में निवासी रहा हो।
- 3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम या अन्य क्षेत्रों के अधिग्रहण के संदर्भ में यह प्रावधान है कि यदि भारत सरकार किसी विदेशी भू-भाग का अर्जन करती है, तो उस भू-भाग के निवासी स्वतः (ipso facto) भारत के नागरिक नहीं बन जाते हैं, बल्कि इसके लिए संसद द्वारा नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत विशेष नियम बनाए जाने अनिवार्य होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संसद द्वारा नागरिकता के संबंध में कानून बनाने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अंतर्गत 'नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) पारित किया गया था, न कि 1957 में। कथन 2 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 6 के तहत पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के संबंध में यही शर्तें निर्धारित की गई थीं, जिसमें 19 जुलाई 1948 की 'परमिट प्रणाली' (Permit System) की तिथि का उल्लेख है। कथन 3 असत्य है क्योंकि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7 के अनुसार, यदि भारत सरकार किसी विदेशी भू-भाग का अर्जन करती है, तो भारत सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उस विशिष्ट भू-भाग के व्यक्तियों को भारत का नागरिक घोषित कर सकती है, और वे स्वतः भारत के नागरिक बन जाते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि लोक सेवा आयोग उन राज्यों के ऐसे समूहों की आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा और राष्ट्रपति के अनुरोध पर ऐसा आयोग उन राज्यों के लिए भी कार्य कर सकता है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु राज्यपाल को यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वह कदाचार के आधार पर राज्य आयोग के किसी सदस्य को सीधे अपने विवेक से पदच्युत कर सकता है।
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद की अवधि (6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो) समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या लाभ के पद के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की विधाई शक्तियों तथा उनकी आपसी अंतःक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार यदि विधान परिषद किसी सामान्य विधेयक को पारित करने से अस्वीकार कर देती है या उसमें ऐसे संशोधन करती है जिनसे विधानसभा सहमत नहीं है, तो विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए जाने पर भी विधान परिषद उसे अधिकतम चार महीने तक ही रोक सकती है (प्रथम बार तीन माह और पुनरीक्षण के पश्चात एक माह)।
2. धन विधेयक (Money Bill) को केवल विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास न तो उसे अस्वीकार करने की शक्ति होती है और न ही उसमें संशोधन करने की; वह इसे अधिकतम चौदह दिनों की अवधि तक ही रोक सकती है।
3. राज्य के वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) पर राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में सामान्य चर्चा होती है, किंतु अनुदान की मांगों पर मतदान (Voting on Demands for Grants) केवल विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है, विधान परिषद को अनुदान मांगों पर मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान की कुंजी किसे कहा जाता है?
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