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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) और उनकी लिपियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश मुहरें सेलखिट (Steatite) से बनाई जाती थीं, हालांकि इसके अतिरिक्त अगेट, चर्ट, तांबे और टेराकोटा की मुहरें भी मिलती हैं।
  2. 2. इस सभ्यता की लिपि को 'बुस्ट्रोफेडान' (Boustrophedon) शैली में लिखा जाता था, जिसमें पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी।
  3. 3. सैंधव मुहरों पर सबसे अधिक बार 'एकसिंगी बैल' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जबकि गाय का अंकन किसी भी मुहर पर नहीं पाया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूरी तरह सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरें (Seals) इस काल के इतिहास, व्यापार और कला को समझने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं। अधिकांश मुहरें सेलखिट (Steatite) पत्थर से बनी होती थीं। इनकी लिपि मुख्यतः चित्रात्मक (Pictographic) थी और इसे 'बुस्ट्रोफेडान' (Boustrophedon) पद्धति से लिखा जाता था जिसमें दिशा पहली पंक्ति में दाईं से बाएं और अगली पंक्ति में बाएं से दाएं होती थी। इन मुहरों पर एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन सबसे सर्वाधिक बार मिलता है, और आश्चर्यजनक रूप से गाय का चित्रण इन मुहरों पर नहीं पाया गया है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी द्वारा लागू 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासक वर्ग और शाही परिवारों में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा हुआ। 2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1850 में पारित 'लेक्स लोकी अधिनियम' (Lex Loci Act या धार्मिक असुविधा अधिनियम) ने हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया, जिससे पारंपरिक भारतीय समाज में भारी धार्मिक असंतोष फैला। 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों और मुक्त व्यापार के एकतरफा प्रवाह के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और सूती वस्त्र उद्योग तबाह हो गए, जिससे ग्रामीण कर्जदारी में भारी वृद्धि हुई और कारीगरों तथा किसानों का यह आक्रोश 1857 के विद्रोह के रूप में प्रकट हुआ। 4. सेना के भीतर लागू किए जाने वाले नियमों, जैसे वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा उपनयन अधिनियम' (General Service Enlistment Act) जिसके तहत नए भारतीय सैनिकों को समुद्र पार ब्रिटिश सीमाओं से बाहर भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया, ने उच्च जातीय हिंदू सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दारा शिकोह ने किस सूफी सिलसिले को संरक्षण दिया था और स्वयं उसका अनुयायी था? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के विरुद्ध विद्रोह का प्रभावी नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना के समक्ष कभी आत्मसमर्पण न करते हुए नेपाल की तराई में पलायन किया। 2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित किया था, जिसके कारण ब्रिटिश प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः अवध के ही पुवायाँ नामक स्थान पर ब्रिटिश सेना द्वारा घेर लिया गया, जहाँ वे भीषण संघर्ष के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए और उनके इस पराक्रम में पुवायाँ के राजा ने अंग्रेजों की पूरी सहायता की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना के प्रारंभिक वर्षों तथा इसके उदारवादी (नरम दल) और राष्ट्रवादी (गरम दल) चरणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक अधिवेशन (1885-1905) के दौरान नरमपंथी नेताओं ने ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते हुए 'प्रार्थना और याचिका' की नीति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1892 का भारत परिषद अधिनियम पारित हुआ, जिसमें विधान परिषदों में भारतीयों के लिए पहली बार अप्रत्यक्ष चुनाव और सीमित प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया। 2. वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान कांग्रेस के भीतर वैचारिक मतभेद गहरे हो गए, तथा गरम दल के नेता (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखकर प्रशासनिक सुधारों तक ही सीमित रखना चाहते थे, जबकि नरमपंथी इसका विस्तार देशव्यापी रूप में करना चाहते थे। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य तात्कालिक कारण अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर था, जहाँ नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाने का समर्थन किया, जबकि गरम दल के नेताओं की इच्छा लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाने की थी। 4. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए गरम दल के प्रमुख नेताओं का दमन किया, जिसके तहत बालगंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए मांडले (बर्मा) भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य एवं राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के सभी मंत्री पूर्णतः सैन्य प्रकृति के होते थे और उन्हें अपने अधीन सैन्य टुकड़ियों का प्रत्यक्ष नेतृत्व करना अनिवार्य था, तथा इनके पद वंशानुगत (hereditary) होते थे। 2. 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल अथवा अन्य क्षेत्रों से राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने (बदले में आक्रमण न करने) के एवज में वसूला जाने वाला 25 प्रतिशत भू-राजस्व था, जबकि 'सरदेशमुखी' संपूर्ण राज्य पर राजा के वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में वसूला जाने वाला 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर था। 3. शिवाजी ने अपनी सेना में जागीरदारी प्रथा को हतोत्साहित करने के लिए सैनिकों और अधिकारियों को भूमि अनुदान (इनाम/जागीर) देने के स्थान पर नकद वेतन देने की परंपरा को अधिक प्राथमिकता दी थी। 4. मराठा घुड़सवार सेना में 'पागा' वे सैनिक थे जो अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे, जबकि 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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