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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) और उनकी लिपियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश मुहरें सेलखिट (Steatite) से बनाई जाती थीं, हालांकि इसके अतिरिक्त अगेट, चर्ट, तांबे और टेराकोटा की मुहरें भी मिलती हैं।
- 2. इस सभ्यता की लिपि को 'बुस्ट्रोफेडान' (Boustrophedon) शैली में लिखा जाता था, जिसमें पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी।
- 3. सैंधव मुहरों पर सबसे अधिक बार 'एकसिंगी बैल' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जबकि गाय का अंकन किसी भी मुहर पर नहीं पाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूरी तरह सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरें (Seals) इस काल के इतिहास, व्यापार और कला को समझने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं। अधिकांश मुहरें सेलखिट (Steatite) पत्थर से बनी होती थीं। इनकी लिपि मुख्यतः चित्रात्मक (Pictographic) थी और इसे 'बुस्ट्रोफेडान' (Boustrophedon) पद्धति से लिखा जाता था जिसमें दिशा पहली पंक्ति में दाईं से बाएं और अगली पंक्ति में बाएं से दाएं होती थी। इन मुहरों पर एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन सबसे सर्वाधिक बार मिलता है, और आश्चर्यजनक रूप से गाय का चित्रण इन मुहरों पर नहीं पाया गया है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य एवं राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे तौर पर कार्य करता था और इनमें से अधिकांश मंत्रियों (पंडितराव और न्यायधीश को छोड़कर) को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
2. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठों द्वारा वसूलए जाने वाले प्रमुख कर थे, जिसमें चौथ मराठा साम्राज्य की सीमा के बाहर के क्षेत्रों से उस क्षेत्र की कुल आय का एक-चौथाई हिस्सा सुरक्षा प्रदान करने के बदले वसूला जाता था, जबकि सरदेशमुखी आंतरिक क्षेत्रों पर उनके पारंपरिक वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
3. शिवाजी ने अपनी सेना में 'पागा' और 'सिलहदार' घुड़सवारों की व्यवस्था की थी, जिसमें पागा घुड़सवार वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और हथियार दिए जाते थे, जबकि सिलहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
4. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की भूमि सुधार प्रणालियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसके तहत उन्होंने भूमि की पैमाइश के लिए 'काठी' और 'बीघा' के मानक माप को अपनाया तथा शुरुआत में उपज का 40% भाग राज्य के कर के रूप में वसूल किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' (1828) ने एकेश्वरवाद का प्रचार किया और मूर्तिपूजा, अवतारवाद तथा पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया, किंतु समाज के संस्थापक द्वारा कभी भी ईसाई या इस्लामिक दर्शन के सिद्धांतों का अपनी रचनाओं में समावेश नहीं किया गया था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, बाल विवाह तथा छुआछूत का जोरदार खंडन किया, साथ ही धर्म-परिवर्तित हिंदुओं की वापसी के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की।
3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में हुए वैचारिक मतभेदों के परिणामस्वरूप वर्ष 1866 में ब्रह्म समाज का प्रथम विभाजन हुआ, जिसके बाद देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' का नेतृत्व किया, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' (Brahmo Samaj of India) की स्थापना की।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा की गई थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे सुधारकों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ, और इस संस्था का मुख्य ध्यान धार्मिक सुधारों की तुलना में सामाजिक सुधारों (जैसे विधवा पुनर्विवाह और अंतरजातीय विवाह) पर अधिक केंद्रित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों और प्रांतीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में केंद्रीय सचिवालय का सर्वोच्च अधिकारी 'मंत्रिहन' कहलाता था, और राजा को प्रशासनिक परामर्श देने के लिए एक छोटी मंत्रिपरिषद होती थी जिसके सदस्यों की योग्यता की जाँच 'उपैधा' (धर्म, धन, काम और भय के परीक्षण) के माध्यम से की जाती थी।
2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन की इकाइयों को 'चक्र' कहा जाता था, जो कुमार या आर्यपुत्र (राजकीय राजकुमारों) के अधीन होते थे, जबकि सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई 'ग्राम' थी जिसका मुखिया 'ग्रामिक' कहलाता था, जो सरकारी अधिकारियों के नियंत्रण से पूरी तरह स्वतंत्र था।
3. अर्थशास्त्र के अनुसार, मौर्य काल में राज्य की ओर से व्यापार और वाणिज्य पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था, जिसके तहत माप-तौल के अधिकारी को 'पोतवाध्यक्ष' और शुल्क (कर) संग्रह करने वाले अधिकारी को 'शुल्क अध्यक्ष' कहा जाता था।
4. अशोक के शिलालेखों में न्याय व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसके तहत महामात्रों को स्थानीय न्यायिक अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया गया था, और कौटिल्य ने न्यायलयों के दो प्रमुख प्रकार बताए हैं—'धर्मस्थीय' (दीवानी न्यायालय) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी न्यायालय)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नसीरुद्दीन खुसरो खाँ के विरुद्ध "इस्लाम खतरे में है" का नारा किसने दिया था?
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ब्रिटिश शासनकाल में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी तथा महालवारी) के वैचारिक आधार, भौगोलिक विस्तार और उनके आर्थिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया था, जिससे जमींदार भूमि के वास्तविक स्वामी बन गए और कंपनी की आय भी अनिश्चितता से मुक्त हो गई।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari Settlement) में सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें बीच के किसी भी बिचौलिए (जमींदार) को मान्यता नहीं दी गई थी और राजस्व की दरें कभी नहीं बदली जाती थीं।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) में भूमि की इकाई व्यक्तिगत कृषक न होकर संपूर्ण ग्राम अथवा ग्रामों का समूह (महाल) होती थी, जिससे पूरे ग्राम समुदाय को सामूहिक रूप से भू-राजस्व चुकाने के लिए उत्तरदायी बनाया गया था।
4. इन भू-राजस्व प्रणालियों के परिणामस्वरूप पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पतन हो गया, कृषि का अत्यधिक वाणिज्यीकरण हुआ, और अत्यधिक लगान के दबाव के कारण किसानों को साहूकारों के चंगुल में फंसना पड़ा जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भारी विखंडन हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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