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History of India
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गुप्तोत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी के रूप में राजा कार्य करता था, किंतु स्थानीय स्तर पर न्याय का संचालन 'श्रेणी', 'पूग' और 'कुल' जैसी संस्थाएं भी करती थीं।
  2. 2. गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम के शासनकाल में नालंदा बौद्ध विहार की स्थापना हुई थी, जिसे आगे चलकर गुप्त शासकों और बाद के राजाओं से व्यापक वित्तीय संरक्षण प्राप्त हुआ।
  3. 3. इस काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य के अंतिम चरण में 'सामंतवाद' (Feudalism) के बीज अंकुरित होने लगे थे और कृषक वर्ग की स्थिति धीरे-धीरे पराधीन होने लगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। गुप्त काल (Gupta Empire) भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहलाता है। इस काल में केंद्रीय प्रशासन अत्यंत सुदृढ़ था जहाँ राजा सर्वोच्च न्यायाधीश होता था, लेकिन ग्राम और निगम स्तर पर स्थानीय विवादों को सुलझाने के लिए 'श्रेणी' (व्यापारियों की संस्था), 'पूग' और 'कुल' को अधिकार प्राप्त थे। कुमारगुप्त प्रथम (महेंद्रादित्य) के शासनकाल में ही प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय की नींव पड़ी थी। इसके अतिरिक्त, ब्राह्मणों, मंदिरों और अधिकारियों को बड़े पैमाने पर कर-मुक्त भूमि दिए जाने की प्रथा (भूमि अनुदान) के कारण सामंती प्रवृत्तियों का उदय हुआ, जिससे प्रशासनिक विकेंद्रीकरण बढ़ा और कृषकों की स्थिति प्रभावित हुई। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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