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History of India
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के प्रसार, उनकी दार्शनिक मान्यताओं तथा समाज पर पड़े प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया, और इन्होंने अपनी रचनाओं में जाति व्यवस्था के कठोर बंधनों का कड़ा विरोध करते हुए स्त्री और शूद्रों के लिए भी भक्ति के द्वार खोल दिए थे।
- 2. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध संत शेख निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत (समां) को स्वीकार किया था, जिसके कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' कहा गया और उन्होंने दिल्ली सल्तनत के कई सुल्तानों के राजदरबारों में उच्च पद स्वीकार किए थे।
- 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को Ramananda ने प्रसारित किया, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए कबीर, रैदास और सेना जैसे विभिन्न पृष्ठभूमियों के संतों को अपना शिष्य बनाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि दक्षिण भारत के अलवार और नयनार संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी और समाज में व्याप्त जातिगत विषमताओं को चुनौती देते हुए सभी वर्गों के लिए भक्ति मार्ग प्रशस्त किया। कथन 2 गलत है क्योंकि शेख निजामुद्दीन औलिया ने संगीत (समां) और योग क्रियाओं को अपनाया था, किंतु उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में सुल्तानों के दरबार से जानबूझकर दूरी बनाए रखी और किसी भी सुल्तान के राजदरबार में कोई उच्च पद स्वीकार नहीं किया। कथन 3 सही है क्योंकि रामानंद ने दक्षिण की भक्ति धारा को उत्तर भारत में पहुँचाया और विभिन्न जातियों के लोगों को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू 'तिनकठिया' प्रणाली के तहत प्रत्येक बीघा जमीन के तीन कट्ठा हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था, जिसे समाप्त करने के लिए महात्मा गांधी ने भारत में पहली बार सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग किया था।
2. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान फसल का उत्पादन सामान्य उत्पादन के एक-चौथाई से भी कम होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा राजस्व वसूलने के निर्णय के खिलाफ, गांधीजी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को 'लगान न चुकाने' (No-Tax Campaign) का स्पष्ट निर्देश दिया था।
3. चंपारण सत्याग्रह के सफल समापन के बाद रविन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इसी आंदोलन के दौरान राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई जैसे नेता गांधीजी के संपर्क में आए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और उनके प्रारंभिक राजनीतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी घाटी के दक्षिण में स्थित था।
2. वज्जी संघ आठ कुलों का एक संघ था, जिसमें 'लिच्छवी' कुल सबसे अधिक शक्तिशाली और प्रमुख था, तथा यहाँ राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली के स्थान पर गणतांत्रिक (संघीय) व्यवस्था प्रचलित थी।
3. अंग महाजनपद की प्रारंभिक राजधानी चंपा थी, जो अपने समय का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, और इसे मगध के शासक बिम्बिसार द्वारा पराजित कर मगध साम्राज्य में मिला लिया गया था।
4. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, जिसके प्रसिद्ध शासक उदयन थे, और बौद्ध ग्रंथों के अनुसार उदयन ने अपने प्रारंभिक जीवन में महात्मा बुद्ध के प्रभाव से बौद्ध धर्म को राजकीय धर्म घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर. सी. मजूमदार
2. "यह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें ब्रिटिश शासन के प्रति कोई राजनीतिक दूरदर्शिता या राष्ट्रीय भावना नहीं थी।" — सर जॉन सीले
3. "यह सुनियोजित राष्ट्रीय षड्यंत्र था, जिसे विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक सुसंगत रणनीति के तहत चलाया गया था।" — वी. डी. सावरकर
4. "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था, जहाँ अंग्रेजों का शासन बनाए रखना मानवता और प्रगति के लिए अनिवार्य था।" — टी. आर. होम्स
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा की भारत की प्रथम यात्रा (1498 ई.) के समय कालीकट के हिंदू शासक 'जमूरिन' (सामुतिरी) ने पुर्तगालियों का स्वागत किया था, क्योंकि वह अरब व्यापारियों के एकाधिकार को तोड़कर काली मिर्च और मसालों के व्यापार को बढ़ाना चाहता था।
2. भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर के रूप में आए फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगालियों का प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करना था।
3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक केंद्र बनाया और भारतीयों के साथ विवाह की नीति (पुनर्जागरण विवाह) को हतोत्साहित किया।
4. पुर्तगालियों ने हिंद महासागर से होने वाले व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'कार्टेज' (Cartaz) व्यवस्था लागू की थी, जिसके तहत अन्य एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाकर लाइसेंस लेना अनिवार्य था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दक्षिण भारत के प्राचीन राजवंशों (पल्लव, चालुक्य एवं चोल) की प्रशासनिक संरचना, सैन्य अभियानों और कला-स्थापत्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, जबकि महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'एकात्म रथ मंदिरों' (सप्त पगोडा) का निर्माण भी उसी के शासनकाल में प्रारंभ हुआ था।
2. बादामी के चालुक्य राजवंश की राजनीतिक शक्ति का वास्तविक संस्थापक पुलकेशिन प्रथम था, जिसने अश्वमेध यज्ञ किया था, और इस राजवंश के शासनकाल में ही प्रसिद्ध जैन मंदिर और अहोल के दुर्गा मंदिर का निर्माण हुआ था।
3. चोल साम्राज्य के अंतर्गत केंद्रीय प्रशासन में उच्च अधिकारियों को 'पेरुंदुरम' (महामात्र) कहा जाता था, तथा संपूर्ण साम्राज्य 'वलनाडु' (मंडलम के अंतर्गत आने वाले जिले) में विभाजित था, जहाँ कर वसूली के लिए 'पुरवुवरीत्तिगागम' विभाग कार्य करता था।
4. पल्लव शासक राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने कांची में प्रसिद्ध 'कैलाशनाथ मंदिर' का निर्माण करवाया था, जिसकी वास्तुकला द्रविड़ शैली के प्रारंभिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है और इसी शैली के आधार पर बाद में चोलों ने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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