त्वरित लिंक्स
History of India
13 views
1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश साम्राज्य के मुकाबले आधुनिक हथियारों, संचार साधनों और एक सुसंगत राजनीतिक व आर्थिक दर्शन का पूर्ण अभाव था।
- 2. अधिकांश भारतीय रियाسतों के शासकों, बड़े जमींदारों और नव-शिक्षित मध्यम वर्ग ने विद्रोह का खुलकर समर्थन किया था ताकि देश को विदेशी दासता से मुक्त कराया जा सके।
- 3. विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं के मध्य केंद्रीय सैन्य कमान, परस्पर सामंजस्य और एक एकीकृत राष्ट्रीय योजना का अभाव था, जिसके कारण अंग्रेजों ने एक-एक करके विद्रोह को कुचल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 का विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक बड़ा मोड़ था, लेकिन यह कई आंतरिक कमजोरियों के कारण असफल रहा। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि विद्रोहियों के पास न तो आधुनिक तकनीक, संचार और हथियारों की बराबरी थी और न ही कोई केंद्रीय नेतृत्व व एकीकृत योजना। इसके विपरीत, कथन 2 गलत है क्योंकि अधिकांश बड़े जमींदारों, रियासती राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निजाम) और आधुनिक शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का समर्थन करने के बजाय अंग्रेजों का साथ दिया था। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
Related Questions
→
मौर्य साम्राज्य के आर्थिक जीवन, राजस्व प्रशासन और मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य काल में राज्य की आय का प्रमुख स्रोत कृषि कर (भाग) था, जो कुल उपज का छठा भाग (1/6) से लेकर एक-चौथाई (1/4) तक वसूला जाता था, तथा इसके अतिरिक्त सिंचाई कर (उदक-भाग) भी लिया जाता था।
2. मौर्य अर्थव्यवस्था में आहत या पंचमार्क (Punch-marked) सिक्के सबसे प्रमुख विनिमय के साधन थे, जिन पर विभिन्न प्रकार के प्रतीक चिह्न (जैसे सूर्य, चंद्रमा, पेड़ और पशु) बने होते थे, और सोने के सिक्कों को 'निष्क' या 'सुवर्ण' कहा जाता था।
3. राज्य द्वारा व्यापार और शिल्प पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था, जिसके लिए 'अध्यक्ष' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी; उदाहरण के लिए, 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य का अध्यक्ष होता था, जबकि 'लक्षणाध्यक्ष' टकसाल (Mint) का प्रमुख अधिकारी होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अप्रैल 1858 में वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेनापति कैप्टन ली ग्रांड को आज़मगढ़ के पास बुरी तरह पराजित किया था, हालांकि इसी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हो गया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापेमार युद्ध) जारी रखा और शाहाबाद के क्षेत्र में एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था एवं सरकार की स्थापना की थी।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारी मेजर विंसेंट आयर और जनरल डगलस ने भारी सैन्य बल का प्रयोग किया, तथा अमर सिंह को पकड़ने में मदद करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन पर भारी इनाम भी घोषित किया था।
4. अमर सिंह को अंततः ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के मैदान में ही मार गिराया गया था, जिसके बाद बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम लौ हमेशा के लिए बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
किस मुगल सम्राट ने मनसबदारों के वेतन में से "खुराक-ए-दाव" (पशुओं के चारे का खर्च) काटने की शुरुआत की थी?
→
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'सोलह महाजनपदों' और 'मगध साम्राज्य के उत्थान' के कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगोत्तर निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध तथा जैन ग्रंथ सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी (वृजि) एक ऐसा महाजनपद था जहाँ राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली के स्थान पर एक शक्तिशाली गणसंघ (संघीय शासन) विद्यमान था।
2. मगध साम्राज्य के अन्य महाजनपदों की तुलना में अत्यधिक शक्तिशाली और साम्राज्यवादी केंद्र बनने के पीछे इसका भौगोलिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत अनुकूल होना मुख्य कारण था, जिसमें राजगीर (गिरिव्रज) का पांच पहाड़ियों से घिरा होना और बाद में पाटलिपुत्र का जल-दुर्ग (Water Fort) के रूप में स्थापित होना शामिल है।
3. मगध की सामरिक सफलता में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर झारखंड के क्षेत्रों से प्राप्त उच्च कोटि के लौह अयस्क की उपलब्धता ने एक बड़ी सेना के लिए उन्नत हथियार और उपकरण बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
4. मगध के शासकों—विशेषकर बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्मनंद—ने केवल सामरिक विजयों पर निर्भरता रखी, और उन्होंने अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत पड़ोसी राज्यों के साथ किसी भी प्रकार के कूटनीतिक वैवाहिक संबंधों या गठबंधन की नीति का पूर्णतः त्याग कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब, जो पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे, ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी पैतृक पेंशन और उपाधि को बंद कर दिया था तथा उन्हें बिठूर से कानपुर आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
2. तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) नाना साहब के अत्यंत योग्य सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक सफल छापामार युद्ध का संचालन किया था।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और राजनीतिक दूत थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में क्रीमिया का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जिसके दौरान 'सती चौरा घाट' की घटना घटी थी, और अंततः नाना साहब ब्रिटिश सेना को परास्त कर सुरक्षित रूप से यूरोप चले गए थे, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.