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History of India
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व संभाला था और अंत में अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल चली गई थीं।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
  3. 3. बेगम हजरत महल के विद्रोह का दमन करने के बाद ब्रिटिश कमांडर कैंपबेल ने लखनऊ पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को रुहेलखंड के एक स्थानीय राजा द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

1857 के विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध का क्षेत्र प्रतिरोध का एक प्रमुख केंद्र बन गया था। बेगम हजरत महल ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और राज्य की बागडोर संभालते हुए ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी। हार के बाद उन्होंने नेपाल में शरण ली और कभी अंग्रेजों के सामने झुकने से इनकार कर दिया। मौलवी अहमदुल्लाह शाह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हें 'डंका शाह' कहा जाता था। उन्होंने चिनहट के प्रसिद्ध युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए 50,000 रुपये का भारी इनाम रखा था। अंततः रुहेलखंड (पवायां) के एक राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई। इस प्रकार तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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