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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों (तीर्थों), गुप्तचर तंत्र और न्याय व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अठारह महत्वपूर्ण उच्च अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनमें 'समहर्त्ता' संपूर्ण साम्राज्य की आय का संग्रहण और वार्षिक बजट तैयार करने का मुख्य अधिकारी होता था, जबकि 'संनिधातृ' राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य संरक्षक था।
  2. 2. मौर्यकालीन गुप्तचर प्रणाली अत्यंत सुदृढ़ थी और अर्थशास्त्र में गुप्तचरों को 'गुढ़पुरुष' कहा गया है, जो दो श्रेणियों में विभक्त थे—'संस्था' (एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले गुप्तचर) और 'संचारा' (एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करने वाले गुप्तचर)।
  3. 3. मौर्य साम्राज्य में न्यायिक प्रशासन के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश स्वयं सम्राट होता था, तथा दीवानी न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और फौजदारी न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, जिनमें फौजदारी न्यायालयों का मुख्य कार्य समाज के असामाजिक तत्वों और अपराधियों का दमन करना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में 18 महत्वपूर्ण अधिकारी होते थे जिन्हें 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहा जाता था। इनमें 'समहर्त्ता' राजस्व संग्रह का प्रमुख अधिकारी और 'संनिधातृ' कोषाध्यक्ष था। मौर्यकालीन गुप्तचर व्यवस्था अत्यंत उन्नत थी, जिसमें 'गुढ़पुरुषों' को 'संस्था' और 'संचारा' श्रेणियों में बांटा गया था। इसके अतिरिक्त, न्याय व्यवस्था में दीवानी मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' तथा फौजदारी (आपराधिक) मामलों के लिए 'कंटकशोधन' न्यायालयों का प्रावधान था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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