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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म पर आधारित न होकर व्यक्ति के कर्म और व्यवसाय पर आधारित था, जिसका स्पष्ट प्रमाण दसवें मंडल के पुरुषसूक्त में मिलता है।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समित जैसी राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव कम हो गया तथा राजा की शक्ति में वृद्धि हुई, साथ ही इस काल में गोत्र प्रथा एक संस्था के रूप में स्थापित हुई।
  3. 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे जुताई, बुай, कटाई और मड़ाई का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो यह दर्शाता है कि उत्तर वैदिक काल की अर्थव्यवस्था पशुपालन से बदलकर कृषि प्रधान हो गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि ऋग्वेद के दसवें मंडल के पुरुषसूक्त में पहली बार चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) की उत्पत्ति का उल्लेख मिलता है, जो जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था और उत्तर वैदिक कालीन कठोरता की ओर शुरुआती संक्रमण का संकेत देता है, हालांकि ऋग्वैदिक समाज मूलतः लचीला था। कथन 2 सही है; उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति की राजनीतिक महत्ता कम हो गई, राजा के अधिकार बढ़ गए और इसी काल में 'गोत्र' व्यवस्था एक सामाजिक संस्था के रूप में स्थापित हुई। कथन 3 सही है; 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि कर्म से संबंधित अनुष्ठानों और जुताई से लेकर मड़ाई तक की संपूर्ण प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण मिलता है, जो यह प्रमाणित करता है कि उत्तर वैदिक काल की मुख्य आर्थिक गतिविधि पशुपालन से स्थानांतरित होकर कृषि बन गई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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