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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान पटना, दानापुर और आरा के अतिरिक्त बिहार के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में हुई घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मुजफ्फरपुर में विद्रोह की चिंगारी भड़काने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी, तथा वहाँ तैनात 38वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध खुला विद्रोह कर दिया था।
- 2. छपरा (सारण) क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व मोहम्मद हुसैन खान ने किया था, जिन्होंने स्थानीय विद्रोही सिपाहियों और आम जनता को संगठित कर ब्रिटिश प्रशासन की रीढ़ तोड़ दी थी और अंग्रेजों के संचार तंत्र को पूरी तरह से ठप कर दिया था।
- 3. आरा के समीपवर्ती क्षेत्रों में बाबू कुंवर सिंह के छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध छपाए-मार (Guerrilla) युद्ध की रणनीति का सफल संचालन किया था, और अंग्रेजों द्वारा नियंत्रण स्थापित किए जाने के बाद भी उन्होंने जंगलों से लंबे समय तक प्रतिरोध जारी रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध व्यापक असंतोष देखा गया था। पटना, दानापुर और आरा (शाहाबाद) के मुख्य केंद्रों के अलावा मुजफ्फरपुर, छपरा (सारण), गया और चंपारण जैसे क्षेत्रों में भी विद्रोह की आग फैल गई थी। मुजफ्फरपुर में तैनात सैनिकों तथा स्थानीय लोगों ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी, वहीं छपरा में मोहम्मद हुसैन खान जैसे स्थानीय नेताओं ने विद्रोह की कमान संभाली। इसके अतिरिक्त, आरा के पतन और वीर कुंवर सिंह की शहादत के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों और जंगलों से अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध जारी रखा था। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भाकना और अन्य प्रवासियों द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को सशस्त्र क्रांति के माध्यम से उखाड़ फेंकना था।
2. इस दल द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्र 'गदर' का शीर्षक 'अंग्रेजी राज का दुश्मन' था, जो प्रारंभिक रूप से गुरुमुखी और उर्दू में प्रकाशित होता था और बाद में अन्य भारतीय भाषाओं में भी जारी किया गया।
3. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के आह्वान पर हजारों प्रवासी भारतीय 'गदर आंदोलन' के तहत भारत लौटे और पंजाब तथा अन्य छावनियों में ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई, जो वर्ष 1915 की शुरुआत में गुप्त सूचना लीक होने के कारण विफल हो गई।
4. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिस्टोरिकल रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) का पुनर्गठन किया गया, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव और भगवती चरण बोहरा जैसे क्रांतिकारियों ने समाजवादी विचारधारा को अपने क्रांतिकारी एजेंडे का मुख्य आधार बनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन और मौर्योत्तर कालीन अर्थव्यवस्था, मुद्रा प्रणाली तथा भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंधों में भारी वृद्धि के कारण सोने के सिक्कों (दीनार) का बड़े पैमाने पर ढलाई और संचलन हुआ, जो गुप्त काल में आकर अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया।
2. सातवाहन काल में भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा का सबसे पहले बड़े पैमाने पर उल्लेख मिलता है, जो मुख्य रूप से ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को धार्मिक और प्रशासनिक छूट के साथ दिए जाते थे।
3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्के (दीनार) कुषाणों के सिक्कों की तुलना में शुद्धता और कलात्मकता में उत्कृष्ट थे, तथा गुप्त काल के अंतिम चरण में विदेशी व्यापार में गिरावट के कारण सोने के सिक्कों की शुद्धता और मात्रा में भारी कमी आ गई थी।
4. गुप्त काल में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' प्रकार के भूमि अनुदानों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सामंती प्रवृत्तियों (Feudal tendencies) का उदय हुआ, जिससे किसानों पर करों का बोझ बढ़ा और उनकी स्थिति अर्ध-दास जैसी होने लगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण, कराची अधिवेशन (1931) और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी ब्रिटेन से द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में असफल होकर लौटे, तो वायसराय लॉर्ड वेलिंगटन ने गांधीजी से मिलने से स्पष्ट इनकार कर दिया और कांग्रेस तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन के पुनः दमन के लिए अध्यादेश (Ordinances) का सहारा लिया।
2. मार्च 1931 में आयोजित कांग्रेस के कराची अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में 'गांधी-इरविन समझौते' को औपचारिक स्वीकृति दी गई तथा पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ 'कम्युनल अवार्ड' और सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना में पुराने 'ब्राउन बेस' मस्कट के स्थान पर शामिल की गई नई 'एनफील्ड राइफल' के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी के प्रयोग की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न किया, क्योंकि इसे उनकी धार्मिक और जातीय आस्था पर सीधा प्रहार माना गया।
2. जनवरी 1857 में दमदम छावनी के एक लांस नायक ने ब्रिटिश अधिकारी के सामने यह खुलासा किया कि कारतूस के आवरण को दांतों से काटने से पहले उसे सूअर और गाय की चर्बी से चिकना किया जाता है, जिससे यह बात सेना में आग की तरह फैल गई।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बास और लेफ्टिनेंट बॉब पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
4. इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सैन्य अदालत द्वारा मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, तथा उनकी रेजिमेंट 34वीं एनआई को इस विद्रोह में संलिप्तता के कारण मई 1857 में आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सैन्य और स्थापत्य प्रणालियों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित करके 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी और मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में एकाश्म (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों का निर्माण करवाया था।
2. हर्ष के शासनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय की यात्रा करने वाले चीनी यात्री ह्वेनसांग (यूएनस्वांग) के अनुसार, साम्राज्य की आय चार भागों में विभाजित थी; जिसमें एक भाग राजा के खर्च के लिए, दूसरा मंत्रियों व अधिकारियों के वेतन के लिए, तीसरा राजकीय कर्मचारियों के लिए और चौथा धार्मिक तथा बौद्ध विहारों के दान के लिए निर्धारित था।
3. चोल राजवंश की प्रसिद्ध स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जो 'उत्तरमेरूर शिलालेखों' से ज्ञात होती है, में ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों का चयन 'कुरावै' नामक गुप्त मतदान (लॉटरी या पर्ची पद्धति) प्रणाली द्वारा किया जाता था।
4. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय और हर्षवर्धन के बीच नर्मदा नदी के तट पर हुए निर्णायक युद्ध का विवरण जैन कवि रविकीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' में प्राप्त होता है, जिसमें हर्षवर्धन की पराजय का स्पष्ट उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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