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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में व्यापारिक विस्तार तथा राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फ्रांसिस कैरो ने मुगल सम्राट औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर वर्ष 1668 में भारत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना सूरत में की थी, जबकि इसके दो वर्ष पश्चात मार्कारा के नेतृत्व में मसूलिपट्टनम में दूसरी फ्रांसीसी फैक्ट्री स्थापित हुई।
- 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में वास्तविक राजनीतिक और व्यापारिक सुदृढ़ीकरण वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से मिला, जिसके तहत मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बंगाल में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ।
- 3. भारत में एंग्लो-फ्रेंच प्रतिद्वंद्विता (कर्नाटक युद्ध) के दौरान, प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48) ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का परिणाम था, जिसका अंत एक्स-ला-शापेली की संधि से हुआ और इसके तहत अंग्रेजों को मद्रास वापस मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के शासनकाल में कोलबर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी। फ्रांसिस कैरो ने 1668 में सूरत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री स्थापित की, और 1669 में मसूलिपट्टनम में दूसरी फैक्ट्री खुली। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल के सूबेदार शाहशुजा से 1651 में 'निशान' मिला, जिससे उन्हें 3000 रुपये वार्षिक कर पर व्यापार की छूट मिली। इसके अतिरिक्त, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रथम कर्नाटक युद्ध ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध (1740-1748) का ही विस्तार था, जो 1748 की 'एक्स-ला-शापेली की संधि' (Treaty of Aix-la-Chapelle) के साथ समाप्त हुआ।
Related Questions
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गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल के दौरान प्रशासनिक शब्दावलियों, भूमि व्यवस्था और आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'निवीधर्माक्षय' (Nividharma akshaya) एक ऐसी स्थायी भूमि-अनुदान व्यवस्था थी जिसमें प्राप्तकर्ता को भूमि को बेचने या दान देने का अधिकार तो होता था, किंतु वह सम्राट की अनुमति के बिना उस भूमि से कर एकत्र नहीं कर सकता था।
2. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा शुरू की गई भूमि अनुदान प्रथा का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघों और ब्राह्मणों को धार्मिक पुण्य अर्जित करने के लिए भूमि दान देना था, जिसने आगे चलकर सामंती प्रवृत्तियों (Feudalism) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में 'अग्रहार' भूमि वह कर-मुक्त भूमि होती थी जो सामान्यतः विद्वान ब्राह्मणों को दान दी जाती थी, और इस पर राज्य द्वारा किसी भी प्रकार का भू-राजस्व नहीं वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगर योजना, जल निकासी प्रणाली और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सभ्यता की अधिकांश बस्तियाँ ग्रिड पद्धति (Grid System) पर आधारित थीं, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और बस्तियों के अधिकांश घरों में पक्की ईंटों के साथ-साथ निजी कुएँ और उत्कृष्ट ढंके हुए नालियों के साक्ष्य मिलते हैं।
2. धौलावीरा (Dholavira) एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल है जो सामान्यतः दो भागों (दुर्ग और निचला नगर) में विभाजित होने के बजाय तीन प्रमुख भागों में विभाजित था, और यहाँ एक उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली तथा विशाल जलकुंडों (Reservoirs) के अवशेष मिले हैं।
3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानानगार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी विशेष अनुष्ठानिक या धार्मिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसकी उत्तर और दक्षिण दिशाओं में सीढ़ियाँ बनी हुई हैं तथा इसके जल के रिसाव को रोकने के लिए बिटुमिन (टार) की परत का उपयोग किया गया था।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का विदेशी व्यापार मुख्य रूप से मेसोपोटामिया के साथ था, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसे सामान्यतः सिंधु क्षेत्र का प्राचीन नाम माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुट् निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध और जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी और मल्ला जैसे महाजनपद 'गणसंघ' (राजतंत्र के स्थान पर कुलीनतंत्रात्मक या गणतांत्रिक व्यवस्था) के उदाहरण थे।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में उदयीन द्वारा इसे पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया गया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थी।
3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, वैशाली और मद्र कुल के राजघराने से संबंध) और अंग महाजनपद को जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने रथमूसल और महाकंटकपाणि जैसे नवीन सैन्य हथियारों का उपयोग कर वज्जी संघ पर विजय प्राप्त की थी।
4. मगध के उत्कर्ष का एकमात्र कारण इसकी उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और समीपवर्ती जंगलों से प्रचुर मात्रा में प्राप्त हाथियों की उपलब्धता थी, क्योंकि मगध के शासकों ने कभी भी लौह अयस्क भंडारों का सैन्य या आर्थिक उपयोग नहीं किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में भारत में यूरोपीय कंपनियों के आगमन और पुर्तगाली तथा ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1612 में हुए 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कप्तान थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया था, जिससे मुगलों के साथ अंग्रेजों के व्यापारिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त हुआ और जहाँगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति दी।
2. पुर्तगालियों ने भारत में अपने व्यापारिक एकाधिकार को सुदृढ़ करने के लिए 'कार्टाज व्यवस्था' (Cartaz System) लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय और एशियाई जहाज को पुर्तगालियों से लाइसेंस (कार्टाज) लेना अनिवार्य था, और अफीम तथा घोड़ों को छोड़कर सभी वस्तुओं का व्यापार इसके दायरे में आता था।
3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस के माध्यम से जहाँगीर के दरबार में शाही फरमान प्राप्त हुआ था, जिसके तहत उन्हें सूरत में कारखाना खोलने और मुगल साम्राज्य के भीतर स्वतंत्र रूप से कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिल गया था।
4. फ्राँसोवा कैरॉन ने वर्ष 1668 में सूरत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले कारखाने की स्थापना की थी, जिसे बाद में कोचीन और मसूलीपट्टम में भी अपनी व्यापारिक बस्तियाँ स्थापित करने में सफलता मिली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक-धार्मिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'राज्य हड़प नीति' के अंतर्गत सतारा, जैतपुर, संबलपुर, उदयपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का विलय भी कुशासन के आधार पर वर्ष 1856 में किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप अवध के सैनिकों, नवाब के आश्रितों और भूस्वामियों में भारी आक्रोश उत्पन्न हुआ।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार होकर कृषि पर आश्रित हो गए, और ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों ने कृषकों को भारी कर के बोझ तले दबाकर ग्रामीण साहूकारों और महाजनों के चंगुल में फंसा दिया।
3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों को अपने पैतृक पूर्वजों की संपत्ति से वंचित करने वाले पुराने कानून को बदल दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और जबरन धर्मांतरण के एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में देखा।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को कम वेतन और विदेशी सेवा भत्ता (Foreign Service Allowance) से वंचित करने की नीति के साथ-साथ वर्ष 1856 के 'सामान्य सेना Enlistment अधिनियम' ने सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं को सीधे तौर पर आहत किया क्योंकि इसके तहत समुद्र पार सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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