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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार ('आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद') की स्थापना की और जापान से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्राप्त कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा।
- 3. फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना करने वाले सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में महात्मा गांधी समर्थित पट्टाभी सीतारमैया को पराजित कर कांग्रेस अध्यक्ष का पद प्राप्त किया था, किंतु कार्यसमिति के गठन पर गांधीजी से मतभेद होने के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
- 4. आज़ाद हिंद फौज (INA) की स्थापना का मूल विचार सर्वप्रथम मोहन सिंह के मन में आया था, जिसे बाद में रास बिहारी बोस ने जापान के सहयोग से पुनर्गठित किया और अंततः सुभाष चंद्र बोस ने इसका सर्वोच्च नेतृत्व संभाला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जनता ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए कई स्थानों पर समानांतर सरकारों का गठन किया, जिसमें सतारा की 'प्रति सरकार' सबसे लंबी अवधि तक चली। वहीं, सुभाष चंद्र बोस ने 1939 के त्रिपुरी संकट के बाद कांग्रेस से अलग होकर 'फॉरवर्ड ब्लॉक' बनाया और बाद में सिंगापुर में 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' की स्थापना की। आज़ाद हिंद फौज (INA) की स्थापना का प्रारंभिक विचार कैप्टन मोहन सिंह का था, जिसे रास बिहारी बोस और सुभाष चंद्र बोस ने ऐतिहासिक आयाम दिया। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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निम्नलिखित में से किस अंग्रेज अधिकारी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती वर्षों में इसे 'डफ़रिन के दिमाग की उपज' (Safety Valve Theory) के रूप में देखा था, और किस क्रांतिकारी नेता ने अपनी पुस्तक 'गार्ड्स ऑफ द नेशन' या 'अनhappy इंडिया' में कांग्रेस की स्थापना को ब्रिटिश साम्राज्य के हितों की रक्षा का साधन बताया था?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और राजकोषीय नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में प्रधानमंत्री का पद 'पेशवा' कहलाता था, जो राजा के बाद सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी था, और इस परिषद का प्रत्येक सदस्य सीधे अपने विभाग का स्वतंत्र प्रमुख होता था तथा उसे सैन्य नेतृत्व करने का भी अनिवार्य अधिकार प्राप्त था।
2. मराठा प्रशासन में भू-राजस्व निर्धारण के लिए मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था को आधार बनाया गया था, जिसके तहत कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत भाग राज्य को कर के रूप में दिया जाता था, जिसे बाद में शिवाजी ने बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया और 'मिरासदारों' के अधिकारों को समाप्त कर दिया।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख बाह्य कर थे; चौथ पड़ोसी क्षेत्रों से सुरक्षा के एवज में वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत कर था, जबकि सरदेशमुखी एक प्रकार का अधिभार (Overcharge) था जो संपूर्ण देश पर उनके वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे के रूप में 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दोहती थी, तथा इस काल में कबीले के मुखिया को 'राजनीन्' या 'गोपा' कहा जाता था।
2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति नामक लोकतांत्रिक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, और शतपथ ब्राह्मण में समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों के रूप में वर्णित किया गया है।
3. वैदिककालीन दर्शनों में 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक महर्षि कपिल माने जाते हैं, जो सभी आस्तिक दर्शनों में सबसे प्राचीन है और इसके अनुसार सृष्टि का निर्माण प्रकृति और पुरुष के मेल से हुआ है।
4. वैदिक साहित्य में प्रयुक्त 'निष्म' और 'शतमान' शब्द शुरुआती दौर में विनिमय के साधन या आभूषण के रूप में प्रयुक्त होने वाली मूल्यवान धातु की मुद्राएँ थीं, जिनका उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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इब्राहिम लोदी की पराजय ने भारत में किस व्यवस्था को समाप्त कर दिया?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्ष और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दानापुर छावनी: 25 जुलाई 1857 को दानापुर की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए।
2. पटना: पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसे बाद में अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सरेआम फांसी दे दी गई थी।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा: इन क्षेत्रों में विद्रोह की कोई भी घटना दर्ज नहीं की गई क्योंकि यहाँ के जमींदारों और स्थानीय जनता ने पूरी तरह से ब्रिटिश प्रशासन का समर्थन किया था।
4. आरा (जगदीशपुर): बाबू वीर कुंवर सिंह ने आरा में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेनापति कैप्टन डनबर को बुरी तरह पराजित किया था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही हैं?
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