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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संदर्भ में विभिन्न ब्रिटिश और भारतीय इतिहासकारों के प्रसिद्ध मतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने वर्ष 1857 के विद्रोह को 'पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका समर्थन करते हुए सर जेम्स आउट्राम ने इसे मुस्लिम षड्यंत्र का परिणाम बताया जिसमें हिन्दू पिछलग्गू की भूमिका में थे।
  2. 2. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में इस घटना को केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न मानकर इसे सुनियोजित 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) की संज्ञा दी थी।
  3. 3. वी.डी. सावरकर (V.D. Savarkar) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया, जबकि अशोक मेहता ने अपनी पुस्तक '1857: महान विद्रोह' में इसे विशुद्ध रूप से एक राष्ट्रीय विद्रोह माना।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति को लेकर विभिन्न इतिहासकारों के मत भिन्न रहे हैं। ब्रिटिश इतिहासकारों जैसे सर जॉन सीले ने इसे 'देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' कहा, जबकि सर जेम्स आउट्राम और डब्ल्यू. टेलर के अनुसार यह 'मुसलमानों का षड्यंत्र था जिसमें हिन्दुओं को आगे किया गया था'। इसके विपरीत, कंजरवेटिव नेता बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में इसे केवल एक सैनिक विद्रोह न मानकर 'राष्ट्रीय विद्रोह' बताया। भारतीय राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से वी.डी. सावरकर ने इसे 'प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' कहा और अशोक मेहता ने भी इसे राष्ट्रीय विद्रोह की संज्ञा दी। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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