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History of India
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1920 के दशक के उत्तरार्ध) के दौरान गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) और उससे संबंधित गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में इस संगठन का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' रखा गया था और इसमें समाजवादी विचारधारा को प्रमुखता दी गई थी।
  2. 2. लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए इसी संगठन के सदस्यों (भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आज़ाद) ने दिसंबर 1928 में लाहौर के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जॉन सॉंडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
  3. 3. केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में 8 अप्रैल 1929 को पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में बम फेंकने की ऐतिहासिक घटना में भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त शामिल थे, और इस घटना का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहनों को बहरी आवाज सुनाना' था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसे 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) नाम दिया गया, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित घोषणा पत्र 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' के माध्यम से समाजवादी आदर्शों को जोड़ा गया। लाला लाजपत राय की मौत का प्रतिशोध लेने हेतु दिसंबर 1928 में जॉन सॉंडर्स का वध किया गया तथा 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय असेंबली में पर्चे फेंककर और बम विस्फोट कर अपनी गिरफ्तारी दी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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