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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी के प्रयोग की बात सामने आने पर भारतीय सिपाहियों में भारी आक्रोश फैल गया।
- 2. 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग का पुरजोर विरोध करते हुए एडजुडेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर गोली चला दी थी।
- 3. मंगल पांडे की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने तुरंत प्रभाव से संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल को हमेशा के लिए वापस ले लिया और चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग पूर्णतः बंद कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण सेना में पुरानी ब्राउन बेस बंदूक के स्थान पर एनफील्ड राइफल का引入 और उसके कारतूसों में चर्बी (गाय और सुअर की) का प्रयोग होना था। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने इसका विरोध करते हुए अधिकारियों पर हमला कर दिया था, जिसके लिए उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। किंतु ब्रिटिश सरकार ने तुरंत हथियार वापस नहीं लिए थे, बल्कि विद्रोह की चिंगारी धीरे-धीरे अन्य छावनियों में फैली। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके संप्रदायों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म का 'प्रतीतसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह बताता है कि संसार की प्रत्येक वस्तु और घटना किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह सम्पूर्ण जगत क्षणिक, अनात्मवादी तथा निरंतर परिवर्तनशील है।
2. जैन धर्म के 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' के अनुसार सत्य के बहुआयामी दृष्टिकोण होते हैं, और चूँकि मानव ज्ञान सापेक्ष होता है, इसलिए किसी भी वस्तु के पूर्ण सत्य को 'स्यात्' (शायद/किसी दृष्टिकोण से) शब्द के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
3. महायान बौद्ध संप्रदाय के अंतर्गत 'बोधिसत्त्व' की अवधारणा का विकास हुआ, जिसके अनुसार बोधिसत्त्व वे पुण्यात्मा व्यक्ति हैं जो स्वयं अपना निर्वाण प्राप्त करने के बाद भी अन्य सभी sentient beings (प्राणियों) के उद्धार और कल्याण के लिए संसार में ही बने रहते हैं।
4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के विपरीत दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का पूर्ण समर्थन करता है कि स्त्रियाँ अपने इसी शरीर के साथ कठोर साधना और मोक्ष मार्ग का पालन करके सर्वोच्च आध्यात्मिक मुक्ति (कैवल्य/मोक्ष) प्राप्त कर सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोही गतिविधियों, नेतृत्व तथा रणनीतिक सफलताओं और विफलताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने किया था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित कर ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया तथा बाद में वहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था संभाली।
2. नाना साहब के मुख्य सैन्य कमांडर तात्या टोपे ने ब्रिटिश सेनापति जनरल विंडहम को कानपुर के निकट पराजित किया, किंतु बाद में सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में आई ब्रिटिश सेना से परास्त होने के बाद वे कालपी और ग्वालियर की ओर निकल गए।
3. अजीमुल्ला खाँ, जो नाना साहब के प्रमुख सलाहकार और कूटनीतिज्ञ थे, ने विद्रोह के दौरान राजनीतिक संपर्कों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा वे लंदन में नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी के लिए भी जाने जाते थे।
4. कानपुर में ब्रिटिश अधिकारी सर ह्यूप्रिट्स (Sir Hugh Wheeler) द्वारा अंग्रेजों के आत्मसमर्पण के उपरांत सतौरा चौरा पर हुई 'बीती हाउस नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील ने शहर में अत्यधिक क्रूरता के साथ दमन चक्र चलाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य एवं रणनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में अंग्रेजों द्वारा उनकी पेंशन रोके जाने और डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स (राज्य हड़प नीति) के तहत उपाधियों के अस्वीकार किए जाने के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी की थी और क्रीमिया युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैन्य कमजोरियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर भारतीय विद्रोह की योजना को वैचारिक आधार दिया था।
3. कानपुर में ब्रिटिश समर्पण के पश्चात जनरल नील द्वारा भारतीय नागरिकों और कैदियों पर ढाए गए अमानवीय अत्याचारों के प्रतिकार के रूप में 'बीबीघर नरसंहार' की घटना घटी, जिसके उपरांत तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा में असफल होने पर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर और कालपी के मोर्चे पर ब्रिटिश सेना के खिलाफ अत्यंत कुशल गोरिल्ला युद्ध का संचालन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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इब्राहिम लोदी का चाचा कौन था जो स्वयं सुल्तान बनना चाहता था और बाबर की सहायता माँगी थी?
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महात्मा गांधी के भारत के प्रारंभिक सत्याग्रहों — चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा प्रणाली' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी, और इस आंदोलन के दौरान ही रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था।
2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) गुजरात में फसल के पूर्णतया विफल हो जाने के कारण उत्पन्न हुआ था, जहाँ राजस्व संहिता के नियमानुसार यदि फसल सामान्य उत्पादन के एक-चौथाई (25 प्रतिशत) से कम होती है, तो किसानों को पूर्ण राजस्व छूट का अधिकार था, जिसे स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों ने मानने से इंकार कर दिया था।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने तुरंत बारडोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और आंदोलन को वापस लेने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिसके परिणामस्वरूप गांधीजी को गिरफ्तार कर छह साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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