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History of India
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों (मोनोलिथिक सप्तपगोडा) का निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया था।
- 2. बादामी के चालुक्य वंश के सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय की नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन के साथ हुए युद्ध में हार हुई थी, जिसकी विस्तृत जानकारी हमें हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' अभिलेख से प्राप्त होती है।
- 3. चोल साम्राज्य के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन (ग्राम प्रशासन) की अनूठी प्रणाली उत्तरैमरूर अभिलेखों से ज्ञात होती है, जहाँ ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुरावलाई' (लॉटरी या पर्ची प्रणाली) पद्धति का प्रयोग किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: पल्लव वंश के शक्तिशाली शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने 642 ई. के आसपास चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को परास्त किया और उसकी राजधानी वातापी पर अधिकार कर लिया, जिसके उपलक्ष्य में उसने 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की और महाबलीपुरम (मामलपुरम) में एकाश्म (monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण करवाया। कथन 2 गलत है: पुलकेशिन द्वितीय और हर्षवर्धन के बीच नर्मदा नदी के तट पर हुए युद्ध का वर्णन हरिषेण रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' में नहीं, बल्कि रविचर्ति द्वारा रचित **विकिपीडिया संदर्भ** (ऐहोल अभिलेख) में मिलता है। कथन 3 सही है: चोल प्रशासन अपनी स्थानीय स्वायत्तता और ग्राम पंचायतों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था, जिसकी जानकारी परान्तक प्रथम के उत्तरैमरूर अभिलेखों से मिलती है, जहाँ 'कुरावलाई' नामक पर्ची पद्धति द्वारा सदस्यों का चुनाव होता था।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली के घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद, वृद्ध और अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट ('शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान') घोषित किया गया, जिससे इस सैन्य विद्रोह को एक अखिल भारतीय राजनीतिक वैधता प्राप्त हुई।
2. दिल्ली में विद्रोह के संचालन और प्रशासनिक निर्णयों के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसमें नागरिक और सैन्य दोनों सदस्य शामिल थे और इसके अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट के व्यक्तिगत आदेशों से स्वतंत्र रूप से लिए जाते थे।
3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अधिकार किए जाने के उपरांत, बहादुर शाह जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया गया तथा उनके पुत्रों एवं पौत्रों को अंग्रेजों द्वारा सरेआम गोली से उड़ा दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1750 ई. में हुई किस संधि के बाद पेशवा मराठा साम्राज्य का वास्तविक और वंशानुगत शासक बन गया?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए विद्रोह और उनके नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर द्वारा क्रूरतापूर्वक कुचल दिया गया और पीर अली सहित कई विद्रोहियों को सरेआम फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के जमींदार वीर कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय राजपूत जमींदारों और अफीम एजेंटों के कारिंदों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान ने प्रशासनिक भवनों पर कब्जा कर ब्रिटिश सत्ता को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
4. आरा (शाहबाद) में वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े गए संघर्ष के दौरान अमर सिंह और हरिकृष्ण सिंह ने प्रशासनिक और सैन्य मोर्चे पर उनका सक्रिय सहयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के ऐतिहासिक विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और महारानी विक्टोरिया की घोषणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की दोहरी शासन प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और कंपनी के समस्त भारतीय प्रशासनिक अधिकार सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन हस्तांतरित कर दिए गए।
2. ब्रिटिश मंत्रिमंडल में एक नए पद 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का सृजन किया गया, जिसे ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी बनाया गया और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया।
3. महारानी विक्टोरिया की घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार देशी रियाسतों के साथ भविष्य में कोई नया विलय या अधिग्रहण नहीं करेगी और उनके दत्तक पुत्र गोद लेने के अधिकारों को मान्यता दी जाएगी।
4. इस घोषणा में यह सख्त कानूनी प्रावधान किया गया कि सभी उच्च प्रशासनिक पदों पर भारतीयों और अंग्रेजों की नियुक्ति के लिए नस्ल या धर्म को आधार न बनाकर केवल खुली और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर चयन किया जाएगा, जो अनिवार्य रूप से भारत और इंग्लैंड में एक साथ आयोजित की जाएंगी।
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