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History of India
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (INA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी द्वारा 'करो या मरो' का नारा दिया गया, जबकि इसी दौरान भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन करने वाले समाजवादी नेताओं जैसे अच्युत पटवर्धन, जयप्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली ने 'रेडियो कांग्रेस' के माध्यम से जनता का मार्गदर्शन किया।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश पहरे से नजरबंदी से बचकर जर्मनी की यात्रा की और वहाँ से उन्होंने बर्लिन रेडियो पर नियमित रूप से भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किए, जहाँ उन्हें सर्वप्रथम 'नेताजी' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
- 3. रास बिहारी बोस द्वारा टोक्यो सम्मेलन में लिए गए निर्णयों के उपरांत बैंकॉक सम्मेलन में 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' की स्थापना की गई और औपचारिक रूप से आजाद हिंद फौज (INA) के सर्वोच्च सेनापति का पद सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण और अच्युत पटवर्धन जैसे समाजवादी नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया तथा 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन किया। कथन 2 गलत है क्योंकि सुभाष चंद्र बोस को 'नेताजी' की उपाधि जर्मनी में नहीं, बल्कि जर्मनी में रहने वाले भारतीयों और उनके सहयोगियों (विशेषकर एडॉल्फ हिटलर के जर्मन विशेष प्रकोष्ठ के भारतीय अधिकारियों) द्वारा दी गई थी, परंतु बर्लिन में ही उन्हें सर्वप्रथम 'नेताजी' कहा गया था, किंतु इतिहासकारों के अनुसार उन्हें यह उपाधि जर्मनी के अधिकारियों या जनता द्वारा नहीं बल्कि उनके अनुयायियों द्वारा दी गई थी और कई स्रोतों के अनुसार यह उपाधि सबसे पहले जर्मनी में भारतीय छात्रों और आजाद हिंद फौज के गठन की प्रक्रिया के दौरान दी गई थी; हालाँकि, मुख्य रूप से जर्मनी पहुँचने पर जर्मन अधिकारियों द्वारा उन्हें 'नेताजी' कहे जाने की बात भ्रामक है, यह उपाधि उनके अपने अनुयायियों द्वारा दी गई थी। यहाँ कथन 2 में 'जर्मनी की यात्रा' सही है लेकिन मानद उपाधि का संदर्भ आंशिक रूप से विवादित हो सकता है; तथापि, कथन 3 पूरी तरह सही है क्योंकि रास बिहारी बोस के प्रयासों से बैंकॉक सम्मेलन में आजाद हिंद फौज की कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपने का निर्णय लिया गया था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में पेशवा नाना साहब, उनके विश्वस्त सेनापति तात्या टोपे और मुख्य कूटनीतिक सलाहकार अजीमुल्ला खां द्वारा संचालित गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने बिठूर को अपना मुख्यालय बनाकर कानपुर में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी और स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का उत्तराधिकारी घोषित करते हुए पेशवा की पदवी धारण की।
2. अजीमुल्ला खां, जो पेशे से एक वकील और कूटनीतिज्ञ थे, ने नाना साहब की ओर से लंदन जाकर ब्रिटिश सरकार के समक्ष पेशवा की पेंशन का मुद्दा उठाया था और बाद में विद्रोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया था।
3. तात्या टोपे ने कानपुर में नाना साहब की सेना के पराजित होने के बाद कालपी और ग्वालियर की ओर कूच किया तथा रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक अत्यंत प्रभावी और आक्रामक सैन्य अभियान का संचालन किया।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के उपरांत घटित 'सतीचौरा घाट नरसंहार' की पूरी योजना और उसके प्रत्यक्ष निष्पादन का तात्कालिक आदेश नाना साहब द्वारा स्वयं व्यक्तिगत रूप से दिया गया था, जिसकी पुष्टि समकालीन ब्रिटिश दस्तावेजों से होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के अन्य प्रमुख क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में घटित घटनाओं और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुजफ्फरपुर में विद्रोह के दौरान विद्रोही सिपाहियों ने वहाँ के अंग्रेज न्यायाधीश जॉन कमिश्नर की हत्या कर दी थी, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही गतिविधियों का संचालन किया गया था।
2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें देशी पैदल सेना (Native Infantry) के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर शाहाबाद क्षेत्र में बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए।
3. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के कठोर दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर फाँसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के दौरान नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से आए विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने पर, अनिच्छुक और वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट (शाहंशाह-ए-हिंदुस्तान) घोषित किया गया, जिससे इस विद्रोह को अखिल भारतीय राजनीतिक वैधता प्राप्त हुई।
2. दिल्ली में वास्तविक सैन्य और प्रशासनिक कमान 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में थी, जिसके प्रधान जनरल बख्त खान थे, जिन्होंने बरेली से आकर विद्रोहियों का नेतृत्व संभाला था और सम्राट के नाम पर प्रशासन चलाया था।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली की घेराबंदी और पुनरधिकार के दौरान ब्रिटिश जनरल जॉन निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए और अंततः उनकी मृत्यु हो गई, जबकि सम्राट बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया था।
4. दिल्ली पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने के उपरांत ब्रिटिश अधिकारी हडसन ने सम्राट के पुत्रों और पोते को बिना किसी मुकदमे के दिल्ली गेट के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी, तथा बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें दिल्ली के लाल किले में ही फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बीजापुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध "गोल गुंबद" (Gumbad) का निर्माण किसने करवाया था?
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश बस्तियों में नगर योजना सामान्यतः 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) पर आधारित थी, जिसमें सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और बस्तियों को मुख्य रूप से दो भागों—पश्चिमी भाग (दुर्ग या गढ़) और पूर्वी भाग (निचला नगर)—में विभाजित किया गया था।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) इस सभ्यता की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का परिचय देता है, जिसके फर्श पर ईंटों की दोहरी परत बिछाकर डामर (Bitumen) या तारकोल का लेप लगाकर जल-निरोधक (Water-tight) बनाया गया था, और इसका मुख्य उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों या सार्वजनिक स्नान के लिए किया जाता था।
3. चहुँदरो एक ऐसा सैंधव स्थल था जहाँ कोई भी गढ़ या दुर्ग नहीं पाया गया है, और यहाँ से मनके बनाने का कारखाना (Bead-making factory), तांबे की वस्तुएं बनाने के साक्ष्य तथा वक्राकार ईंटों के प्रमाण मिले हैं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे और पारे के धातु-विज्ञान (Metallurgy) से भली-भांति परिचित थे तथा उन्होंने तांबे और टिन को मिलाकर बड़े पैमाने पर उच्च कोटि के लोहे के अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था, जिसके कारण वे समकालीन मेसोपोटामिया की सभ्यता पर सैन्य रूप से हावी रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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