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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया है, जिसके अनुसार स्वामी (राजा), आमात्य (मंत्री), जनपद (क्षेत्र और जनता), दुर्ग, कोष, सेना और मित्र राज्य के सात आवश्यक अंग हैं।
  2. 2. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न आर्थिक विभागों के नियंत्रक अधिकारी होते थे, उदाहरणार्थ- 'सुवर्णध्यक्ष' खानों का अध्यक्ष, 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य का अध्यक्ष और 'सीताध्यक्ष' राजकीय कृषि भूमि की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी था।
  3. 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर पालिका द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों में विभाजित थी और प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे, जो नगर की सफाई, विदेशी पर्यटकों, जन्म-मृत्यु तथा व्यापार-वाणिज्य का नियमन करते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र में राज्य के सप्तांग सिद्धांत का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसमें राज्य के सात अंगों का उल्लेख है। मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था में विभिन्न विभागों के प्रमुखों को 'अध्यक्ष' कहा जाता था, जैसे कृषि भूमि के अध्यक्ष को 'सीताध्यक्ष' और वाणिज्य के अध्यक्ष को 'पण्यध्यक्ष' कहा जाता था। इसके अतिरिक्त, मेगास्थनीज की 'इंडिका' के विवरण के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था और प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे (कुल 30 सदस्य)। इस विषय के अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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