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History of India
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और शिवाजी की राजव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन सीधे कार्य करता था और व्यक्तिगत रूप से राजा के प्रति उत्तरदायी था, न कि किसी संयुक्त मंत्रिमंडल के रूप में।
- 2. 'अष्टप्रधान' व्यवस्था में 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी छह मंत्रियों (जैसे पेशवा, आमात्य, मंत्री आदि) को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना पड़ता था और सेना का प्रत्यक्ष संचालन करना होता था।
- 3. शिवाजी के भू-राजस्व प्रशासन में 'काठी' नामक माप की इकाई का प्रयोग भूमि की पैमाइश के लिए किया जाता था, और उन्होंने किसानों से सीधे कर वसूलने की प्रणाली को बढ़ावा देते हुए 'मिरासदारों' (वंशागत भूमि अधिकारों वाले लोगों) के विशेषाधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: शिवाजी की 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में कुल आठ मंत्री होते थे, किंतु यह कोई कैबिनेट या आधुनिक अर्थों में मंत्रिमंडल नहीं था। ये सभी मंत्री व्यक्तिगत रूप से छत्रपति के सचिव के रूप में कार्य करते थे और राजा के प्रति उत्तरदायी होते थे। कथन 2 सही है: पंडितराव (धार्मिक मामलों के प्रमुख) और न्यायाधीश (न्याय विभाग के प्रमुख) को छोड़कर शेष छह मंत्री- पेशवा, अमात्य (मजूमदार), वाणनवीस (सुरनीस), सचिव (दाबीर), सुमंत (विदेशी मामलों के मंत्री) और सेनापति (सर-ए-नौबत)- को आवश्यकता पड़ने पर युद्ध अभियानों में भाग लेना और सेना का नेतृत्व करना पड़ता था। कथन 3 गलत है: शिवाजी ने किसानों को राहत देने के लिए मालगुजारी प्रणाली में सुधार अवश्य किए, किंतु उन्होंने महाराष्ट्र के पारंपरिक 'मिरासदारों' (वंशागत भूमि अधिकारों वाले शक्तिशाली भूस्वामियों) के अधिकारों को समाप्त नहीं किया, क्योंकि वे स्थानीय समाज और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार थे। छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासनिक और सैन्य सुधारों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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विजयनगर साम्राज्य में "गणिकाओं" (Courtesans) पर लगने वाले कर का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता था?
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जून 1947 की माउंटबेटन योजना और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों व ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना (3 जून योजना) के तहत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों (मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों की) में होंगी, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय ले सकें।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के साथ मिलने का निर्णय करने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) आयोजित किया गया था, जिसमें NWFP के लोगों ने बहिष्कार के बावजूद जनमत संग्रह में भाग लेकर पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया, जबकि सिलहट ने भी पाकिस्तान के साथ जाने का विकल्प चुना।
3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता को समाप्त करते हुए 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन की स्थापना की गई, तथा दोनों डोमिनियन की संविधान सभाओं को अपनी स्वतंत्र संविधान बनाने और ब्रिटिश संसद के किसी भी अधिनियम को रद्द करने की पूर्ण विधायी संप्रभुता प्रदान की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय समाज-सुधार आंदोलनों और उनके प्रणेताओं के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति प्राप्त करना था और इसने भौतिक उन्नति या सामाजिक कल्याण के कार्यों को पूर्णतः त्याग दिया था।
2. ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और पुरोहिती व्यवस्था का विरोध करते हुए शूद्रों तथा अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
3. गोपाल गणेश आगरकर ने 'सुधारक' नामक समाचार पत्र के माध्यम से अंधविश्वास, बाल विवाह और सामाजिक रूढ़ियों की कड़ी आलोचना की तथा सामाजिक सुधार को राजनीतिक स्वतंत्रता से अधिक प्राथमिकता दी।
4. एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसायटी के माध्यम से प्राचीन हिंदू धर्म और उसकी दार्शनिक परंपराओं का समर्थन करते हुए भारतीय पुनरुत्थान में योगदान दिया, किंतु उन्होंने जाति व्यवस्था और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर समर्थन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में सत्ता के वास्तविक स्वरूप और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पर अधिकार करने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा के बावजूद भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था, और उन्होंने इस विप्लव को वैधानिकता प्रदान करने में प्रतीकात्मक रूप से केंद्रीय भूमिका निभाई।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का दैनिक सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स' (Court of Administrators) के हाथों में था, जिसमें मुख्य रूप से सैनिक और नागरिक प्रतिनिधि शामिल थे, तथा सम्राट जफर इस संस्था के निर्णयों को अपनी इच्छा से पलटने की असीमित शक्ति रखते थे।
3. दिल्ली में अंग्रेजी सेना के पुनरधिकार अभियान के दौरान ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन से संबंधित क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली — जॉन निकलसन
2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम
3. झांसी और ग्वालियर — सर ह्यूरोज
4. रोहिलखंड — मेजर जनरल हैवलॉक
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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