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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनकी विशिष्ट पुरातात्विक विशेषताओं पर विचार कीजिए:
- 1. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसके उत्तर और दक्षिण में सीढ़ियाँ बनी हुई हैं तथा इसके जल को रिसाव से बचाने के लिए बिटुमिन (टार) की परत का उपयोग किया गया था।
- 2. चान्हूड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार का 'दुर्ग' (Citadel) नहीं मिला है, और यह स्थल विशेष रूप से मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory), कांस्य की गाड़ियों और इंकपॉट (स्याही की दवात) जैसी वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था।
- 3. लोथल में पाया गया 'गोदीवाड़ा' (Dockyard) ईंटों से निर्मित एक विशाल संरचना है, जो इसे पश्चिमी एशिया के साथ समुद्री व्यापार का प्रमुख बंदरगाह साबित करती है, और यहाँ से चावल के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) अपनी नगर नियोजन, उन्नत जल प्रबंधन और हस्तशिल्प उद्योगों के लिए विश्व प्रसिद्ध रही है। मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार सार्वजनिक अनुष्ठानों का प्रतीक माना जाता है। चान्हूड़ो बिना दुर्ग वाला अकेला प्रमुख औद्योगिक नगर था जहाँ मनके और शिल्प का कार्य बड़े पैमाने पर होता था। लोथल का गोदीवाड़ा (Dockyard) यह सिद्ध करता है कि हड़प्पावासी समुद्री व्यापार में दक्ष थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा दिए गए शाही चार्टर (राजकीय अधिकार पत्र) के माध्यम से पूर्व के साथ व्यापार करने का एकाधिकार मिला, जो अनिश्चित काल के लिए वैध था और इसे किसी भी ब्रिटिश शासक द्वारा कभी भी रद्द नहीं किया जा सकता था।
2. वर्ष 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में राजा जेम्स प्रथम का पत्र लेकर सूरत पहुंचा, और हालांकि जहांगीर ने उसे आगरा में व्यापारिक कोठी स्थापित करने की अनुमति प्रदान कर दी थी, किंतु पुर्तगालियों के तीव्र विरोध के कारण इस अनुमति को बाद में रद्द करना पड़ा था।
3. वर्ष 1612 में 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में ब्रिटिश कमांडर थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगल दरबार में अंग्रेजों का प्रभाव काफी बढ़ गया और जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी रूप से कारखाना स्थापित करने की शाही फरमान द्वारा अनुमति दे दी।
4. भारत के पूर्वी तट पर अंग्रेजों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1611 में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी, जो कि गोलकुंडा सल्तनत के अंतर्गत स्थित था और यह बंदरगाह दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मसालों के व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिसंबर 1802 ई. में बाजीराव द्वितीय और अंग्रेजों के बीच कौन सी अपमानजनक संधि हुई थी?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में संचालित स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक तथा व्यावहारिक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, तथा इस आंदोलन के दौरान सर्वप्रथम 'वंदे मातरम्' को आंदोलन का मुख्य राष्ट्रीय गीत बनाया गया।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर बल देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर अनेक स्वदेशी उद्योगों, बैंकों और बीमा कंपनियों की स्थापना की रूपरेखा तैयार की थी।
3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बंबई और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, तथा सैयद حیدر رضا (सैयद हैदर रज़ा) ने दिल्ली में इस आंदोलन का सक्रिय नेतृत्व किया।
4. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम किसानों और बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी ने राष्ट्रवादी नेताओं का पूर्ण समर्थन किया, तथा पूर्वी बंगाल के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था तथा भूमि अनुदान (Land Grants) प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश द्वारा ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि या गाँवों के अनुदान देने की प्रथा को बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि का विस्तार करना और धार्मिक पुण्य अर्जित करना था।
2. गुप्त काल में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' प्रकार के भूमि अनुदानों के माध्यम से स्थानीय प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी अनुदान प्राप्तकर्ताओं को हस्तांतरित होने लगे, जिससे सामंती व्यवस्था (Feudalism) के बीज अंकुरित होने लगे थे।
3. गुप्त सम्राटों के काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार के पतन के कारण सोने के सिक्कों का प्रचलन पूरी तरह बंद हो गया था, और व्यापारिक गतिविधियों के ठप होने से संपूर्ण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ग्रामीण और वस्तु-विनिमय पर आधारित हो गई थी।
4. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में तांबे के सिक्कों की प्रचुरता यह दर्शाती है कि सामान्य जनजीवन और दैनिक लेन-देन में मुद्रा अर्थव्यवस्था का व्यापक उपयोग होता था, जबकि बड़े पैमाने पर स्वर्ण सिक्के (दीनार) मुख्य रूप से उच्च वर्गीय व्यापार और संचय के साधन थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिखों के किस गुरु को अकबर ने 500 बीघा जमीन दान में दी थी, जहाँ अमृतसर नगर बसा?
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