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History of India
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मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के दौरान आर्थिक संरचना, सिक्कों के प्रचलन और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गुप्त काल में कुषाण काल की तुलना में सोने के सिक्कों (दीनार) की प्रचुरता तो अवश्य मिलती है, किंतु उनकी शुद्धता में निरंतर गिरावट आई तथा उत्तर-गुप्त काल तक आते-आते सोने के सिक्कों का प्रचलन लगभग समाप्त हो गया और व्यापार में मुद्राहीनता (Monetization decline) की स्थिति उत्पन्न हो गई।
- 2. सातवाहन काल से आरंभ हुई ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को भूमि अनुदान (Agrahara) देने की प्रथा गुप्त काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक एवं आर्थिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिला और स्थानीय किसानों पर सामंती नियंत्रण मजबूत हुआ।
- 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में आंतरिक व्यापार का भारी पतन हो चुका था, जिसके कारण श्रेणियों (Guilds/Shrenis) का महत्व पूरी तरह समाप्त हो गया और नगरों (जैसे पाटलिपुत्र और वैशाली) का क्षय होने लगा, जैसा कि फाह्यान और ह्वेनसांग के विवरणों से स्पष्ट होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों में शुद्धता उच्च कोटि की थी, जबकि गुप्त काल (विशेषकर उत्तर गुप्त काल तक आते-आते) में सोने के सिक्कों में मिलावट बढ़ने लगी और सामंती अर्थव्यवस्था के उभार के कारण सिक्कों का प्रचलन घटने लगा। कथन 2 सही है क्योंकि सातवाहन काल से शुरू हुई धार्मिक भूमि अनुदान की प्रथा गुप्त काल में बड़े पैमाने पर फैली, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े। कथन 3 गलत है क्योंकि गुप्त काल में श्रेणियों (Shrenis) का अस्तित्व बना रहा और उनके द्वारा अपने नियम संचालित किए जाते थे, हालांकि विदेशी व्यापार में गिरावट जरूर आई थी। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा अंतर सही सुमेलित है?
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मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक के शिलालेखों, धम्म की संकल्पना और उनकी प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अशोक के अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में उत्कीर्ण हैं, किंतु उत्तर-पश्चिम में स्थित शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में हैं, जबकि कंधार से प्राप्त द्विभाषी (यूनानी और अरामैक) अभिलेख ग्रीक और अरामैक लिपियों में लिखे गए हैं।
2. अशोक के लघु शिलालेखों में उसके व्यक्तिगत नाम 'अशोक' का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जैसे कि मास्की, गविमठ, नेट् टूर और उडेगोलाम के अभिलेख, जो यह प्रमाणित करते हैं कि प्राचीन भारत में मौर्य सम्राटों का नाम केवल पुराणों तक ही सीमित नहीं था।
3. अशोक के धम्म की नीति कोई नया राजधर्म या बौद्ध धर्म का राजनीतिक प्रचार नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक आचार संहिता थी जिसमें बड़ों का आदर, गुरुजनों की सेवा, जीवों के प्रति अहिंसा और दासों एवं नौकरों के साथ उचित व्यवहार जैसी सर्वमान्य सामाजिक और मानवीय मूल्य शामिल थे।
4. अशोक के कलिंग विजय के तुरंत उपरांत उसने बौद्ध धर्म त्यागकर आजीविक संप्रदाय को पूर्ण रूप से अपना लिया था, जिसका प्रमाण उसके द्वारा बराबर पहाड़ियों में आजीविकों के लिए चार गुफाओं (चंपा, गोपी, बधैत और विश्वझोपड़ी) का निर्माण करवाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन तक के राजनीतिक घटनाक्रम और नरम दल-गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच बंगाल विभाजन को लेकर गहरा मतभेद उभरकर सामने आया, जहाँ गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में नरमपंथियों ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने का प्रयास किया, जबकि गरमपंथी इसे पूरे देश में फैलाना चाहते थे।
2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) के लक्ष्य को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया तथा स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्ताव पारित किए।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन केवल अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर हुआ था, क्योंकि नरमपंथी रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि गरमपंथी लाला लाजपत राय या बालगंगाधर तिलक को अध्यक्ष पद पर देखना चाहते थे; इस अधिवेशन के उपरांत गरमपंथी नेताओं को अगले नौ वर्षों तक कांग्रेस संगठन से बाहर रहना पड़ा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल प्रशासन की आधिकारिक राजभाषा (Official Language) क्या थी?
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