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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1651 में शाहशुजा (बंगाल के सूबेदार) द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को 'निशान' प्रदान किया गया था, जिसके तहत कंपनी को एकमुश्त 3000 रुपये वार्षिक भुगतान के बदले बंगाल में कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिल गया था।
  2. 2. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी किए गए ऐतिहासिक 'शाही फरमान' के द्वारा ब्रिटिश कंपनी को बंगाल, गुजरात और हैदराबाद में बिना किसी अतिरिक्त कर के व्यापार करने की अनुमति दी गई, तथा कंपनी को कलकत्ता के आसपास के 38 गाँवों को किराए पर लेने का अधिकार भी प्राप्त हुआ।
  3. 3. फर्रुख्शियर के इस फरमान के तहत कंपनी को अपने नाम के सिक्के ढालने की अनुमति तो मिल गई थी, किंतु कंपनी के अधिकारियों द्वारा अपने निजी व्यापार के लिए इस 'दस्तक' (पास) के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खान ने कड़े प्रतिबंध लागू किए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि वर्ष 1651 में बंगाल के सूबेदार शाहशुजा ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले मुक्त व्यापार की अनुमति दी थी। कथन 2 गलत है क्योंकि फर्रुख्शियर के 1717 के फरमान के तहत कंपनी को कलकत्ता के आसपास के 38 गाँवों को खरीदने (किराये पर लेने नहीं) की अनुमति मिली थी, न कि केवल हैदराबाद में कर-मुक्त व्यापार की (हैदराबाद में उन्हें स्थानीय नवाबों द्वारा कर चुकाना पड़ता था)। कथन 3 सही है क्योंकि फरमान के तहत कंपनी को अपने सिक्के ढालने का अधिकार मिला था और 'दस्तक' (पास) के निजी दुरुपयोग को लेकर नवाब मुर्शिद कुली खान तथा अलीवर्दी खान ने इसका कड़ा विरोध किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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