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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' (Government of India Act 1858) और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया, जिसे सहायता देने के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।
- 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें हथियाने की नीति (व्यपगत का सिद्धांत) को त्याग देगी और भविष्य में किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय विस्तार नहीं किया जाएगा।
- 3. इस घोषणा में धार्मिक और सामाजिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति अपनाने तथा नस्ल, वर्ण या जन्म के आधार पर किसी भी भारतीय को योग्यता के बिना भेदभाव किए बिना सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्त करने का वादा किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 1857 के विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। इसके साथ ही पिट्स इंडिया एक्ट 1784 द्वारा स्थापित 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की दोहरी प्रणाली समाप्त कर दी गई तथा ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य को 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के रूप में नियुक्त किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'इंडियन काउंसिल' बनाई गई। कथन 2 गलत है क्योंकि क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में भारतीय राजाओं के प्रति निष्ठा और संप्रभुता का सम्मान करने तथा 'गोद लेने के अधिकार' (Doctrine of Lapse का त्याग) को मान्यता देने की बात अवश्य कही गई थी, किंतु ब्रिटिश सरकार ने भविष्य में किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय विस्तार (Territorial Expansion) से पूर्णतः तौबा नहीं किया था, बल्कि देशी रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन अधीनस्थ सहयोग (Subordinate Union) के रूप में स्वीकार किया गया। कथन 3 सही है क्योंकि इस घोषणा में रानी ने भारतीयों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विश्वासों में अहस्तक्षेप करने तथा योग्यता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरियों (सार्वजनिक सेवाओं) में भारतीयों को अवसर देने का ऐतिहासिक आश्वासन दिया था। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
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सत्रहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन, पुर्तगाली प्रभुत्व के पतन और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1612 में स्वाली के युद्ध (Battle of Swally) में ब्रिटिश नौसेना ने पुर्तगालियों को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगलों के साथ अंग्रेजों के व्यापारिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त हुआ और जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति दे दी।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1639 में चंद्रगिरी के स्थानीय शासक से मद्रासपट्टनम (मद्रास) पट्टे पर प्राप्त किया और वहाँ सेंट जॉर्ज किले की स्थापना की, जो दक्षिण भारत में उनका प्रमुख व्यापारिक केंद्र बना।
3. पुर्तगालियों ने वर्ष 1661 में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय को पुर्तगाली राजकुमारी ब्रिगान्सा की कैथरीन के साथ विवाह के अवसर पर दहेज के रूप में बंबई (बॉम्बे) द्वीप सौंपा था, जिसे बाद में सम्राट ने 1668 में मात्र 10 पाउंड के वार्षिक किराए पर ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बाजीराव प्रथम ने किस युद्ध के बाद निजाम को "मुंगी शिवगाँव की संधि" के लिए मजबूर किया?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में स्थापित 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुट् निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें 'अश्मक' (Assaka) एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर दक्षिण भारत में स्थित था।
2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति अपनाई, तथा उसने अपनी कूटनीति के तहत अवंती के शासक प्रद्योत के पांडुरोग (पीलिया) से ग्रसित होने पर अपने प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा के लिए उज्जैन भेजा था।
3. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (ककवर्ण) के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था, जिसमें बौद्ध संघ का पहली बार स्थविर और महासंघिक के रूप में विभाजन हुआ था।
4. महापदमनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकराट' कहा गया है, जिसने नंद वंश की नींव रखी और कलिंग को जीतकर मगध साम्राज्य में मिला लिया था, जिसका प्रमाण हाथीगुंफा अभिलेख से मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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