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History of India
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मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और अशोक के धम्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (प्रकृति) का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है, जिसमें 'कोश' (राजकोष) और 'दंड' (सेना/दण्डशक्ति) को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण और शीर्ष अंग के रूप में मान्यता दी गई है, तथा केंद्रीय प्रशासन में 'समाहर्ता' आय का संग्रह करने वाला और 'सन्निधातृ' राजकोष का मुख्य संरक्षक अधिकारी होता था।
- 2. अशोक के शिलालेखों और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, साम्राज्य चार मुख्य प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ उत्तरापथ (तक्षशिला), दक्षिणापथ (सुवर्णगिरि), अवंतीराष्ट्र (उज्जैन) और प्राच्य (पाटलिपुत्र) थीं, और इन प्रांतों के प्रशासन का संचालन राजपरिवार के कुमार या आर्यपुत्र नामक पदाधिकारियों द्वारा किया जाता था।
- 3. अशोक के 'धम्म' में बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्यों और निर्वाण प्राप्ति के मार्ग का प्रत्यक्ष उपदेश दिया गया है, तथा उसने अपने धम्म की नीतियों के प्रचार-प्रसार के लिए 'धर्ममहामात्र' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी जो समाज के सभी वर्गों में नैतिक आचरण को बढ़ावा देते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सप्तांग सिद्धांत (स्वामी, आमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, दण्ड और मित्र) का वर्णन है, जिसमें समाहर्ता (राजस्व संग्रह) और सन्निधातृ (कोषागार) प्रमुख केंद्रीय अधिकारी थे। कथन 2 सही है क्योंकि अशोक के काल में मौर्य साम्राज्य पाँच प्रमुख प्रांतों में विभाजित था (प्राच्य सहित) और इनका संचालन कुमार/आर्यपुत्र करते थे। कथन 3 गलत है क्योंकि अशोक का 'धम्म' कोई नया धर्म या बौद्ध धर्म का सार नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक आचार संहिता (Moral Code of Conduct) था जो सभी धर्मों के सार और सहिष्णुता पर आधारित था, हालांकि अशोक स्वयं बौद्ध था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के प्रारंभिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो विंध्य पर्वत के दक्षिण में गोदावरी नदी के घाटी क्षेत्र में स्थित था।
2. मगध के प्रारंभिक शासक बिम्बिसार ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, वैशाली और मद्र (पंजाब) के राजपरिवारों से वैवाहिक संबंध स्थापित किए।
3. अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार की हत्या कर मगध की गद्दी संभाली, और उसके शासनकाल के आठवें वर्ष में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ, जिसके अवशेषों पर उसने राजगृह में स्तूप का निर्माण करवाया।
4. मगध के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति का बहुत बड़ा योगदान था, विशेष रूप से राजगृह और पाटलिपुत्र की सामरिक सुरक्षा तथा पास के क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लौह अयस्क के भंडारों ने मगध को एक शक्तिशाली सैन्य राज्य बनने में मदद की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में प्रांतों को क्या कहा जाता था?
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गदर पार्टी और उसके संस्थापकों तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भाकना और बाबा ज्वाला सिंह के सहयोग से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।
2. इस पार्टी द्वारा 'गदर' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया गया था, जो मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में छपता था ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य के अत्याचारों की पोल खोली जा सके।
3. गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन हथियारों और वित्त की सहायता से भारत में सैन्याद्रोह (1915 की गदर योजना) आयोजित करने का प्रयास किया था, जो मुखबिरी के कारण असफल हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल से बाहर इस आंदोलन के प्रसार, प्रमुख नेताओं की भूमिका तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में तथा अजीत सिंह और सैयद حیدر رضا ने उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था।
2. मद्रास प्रेसीडेंसी में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने और दक्षिण भारत में इसका मुखर प्रसार करने में वी. चिदंबरम पिलर (VO Chidambaram Pillai) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिन्होंने स्वदेशी नेविगेशन कंपनी की स्थापना कर ब्रिटिश शिपिंग कंपनी को कड़ी चुनौती दी थी।
3. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया था, किंतु गरमपंथी नेता बंगाल से बाहर इस आंदोलन के विस्तार और इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने को लेकर नरमपंथियों के साथ पूर्णतः सहमत नहीं थे।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की माँग को बल देते हुए कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना अगस्त 1906 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना था जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र नाथ बोस बने थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "परगना":
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