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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके कारणों के विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस इतिहासकार ने यह मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह राष्ट्रीय विद्रोह नहीं था, बल्कि केवल एक सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny) मात्र था'?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह के बारे में प्रसिद्ध कथन कहा था कि यह विद्रोह 'देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' (a wholly unpatriotic and selfish sepoy mutiny) था। इसके विपरीत, वी. डी. सावरकर ने इसे अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व, सैन्य रणनीतियों और संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाबू कुंवर सिंह ने जगदीशपुर छोड़ने के बाद अपने सैन्य अभियानों के दौरान मिर्जापुर, बांदा और रीवा के राजाओं से सहायता प्राप्त करते हुए कानपुर और लखनऊ में नाना साहब की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध प्रभावी सैन्य कार्रवाई की थी।
2. ब्रिटिश सेनापति मेजर विन्सेंट आयर और कैप्टन ली ग्रैंड के विरुद्ध लड़े गए संघर्षों में कुंवर सिंह ने अपनी अद्भुत छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) शैली का परिचय दिया, और बीबीगंज के निकट हुए निर्णायक संघर्ष में कैप्टन ली ग्रैंड की सेना को पूरी तरह पराजित कर दिया था।
3. अप्रैल 1858 में अपनी अंतिम लड़ाई में ब्रिटिश जनरल डगलस की सेना को परास्त करते हुए जगदीशपुर वापस लौटते समय कुंवर सिंह ने गंगा नदी पार करते वक्त दाहिने हाथ में गोली लगने पर स्वयं अपनी तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
4. कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर रेंज) से अंग्रेजों के विरुद्ध समानांतर सरकार और सफल छापामार प्रतिरोध जारी रखा, तथा जंगल युद्ध की नीति अपनाकर ब्रिटिश सत्ता की नींद उड़ा दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के वैचारिक और संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवाद पर बल दिया, किंतु उन्होंने ईसाई धर्म के त्रित्व (Trinity) सिद्धांत को स्वीकार न करते हुए 'द प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' में केवल ईसा मसीह के नैतिक और दार्शनिक उपदेशों की प्रशंसा की थी।
2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति प्राप्त करना था, और इस संस्था ने वेदान्त दर्शन के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज सुधार, शिक्षा विस्तार और राहत कार्यों जैसे व्यावहारिक कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों (अस्पृश्य जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और शोषणकारी सामाजिक व्यवस्था से मुक्त कराना तथा उन्हें आत्मसम्मान प्रदान करना था।
4. एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसाइटी के भारतीय मुख्यालय की स्थापना अड्यार (मद्रास) में की थी, और उन्होंने प्राचीन हिंदू धर्म के पुनरुत्थान के साथ-साथ बाल विवाह, जाति भेद जैसी सामाजिक कुप्रथाओं का समर्थन करते हुए भारतीय राजनीति में 'होम रूल लीग' आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (इस्तमरारी प्रबंध) के अंतर्गत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, जिसमें कुल वसूल किए जाने वाले राजस्व का 10/11 भाग जमींदारों को अपने पास रखना होता था और केवल 1/11 भाग ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को देना होता था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसानों (रयतों) के बीच सीधा अनुबंध होता था, तथा इसमें भूमि का स्वामित्व किसानों को सौंप दिया गया था, बशर्ते वे समय पर कर का भुगतान करते रहें।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण और संग्रह के लिए व्यक्तिगत किसानों के साथ अनुबंध न करके पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' (गाँव या गाँवों के समूह) को एक इकाई माना जाता था, और सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान की जिम्मेदारी पूरे ग्राम्य समाज की होती थी।
4. इन तीनों प्रमुख प्रणालियों में से 'रयतवारी व्यवस्था' के माध्यम से ब्रिटिश भारत के कुल कृषि योग्य क्षेत्र का सबसे बड़ा भाग (लगभग 51%) कवर किया गया था, जबकि स्थाई बंदोबस्त के अधीन लगभग 19% और महालवारी व्यवस्था के अधीन लगभग 30% क्षेत्र आता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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