त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, मुजफ्फरपुर और छपरा में घटित घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर शाहाबाद (आरा) की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह से नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया।
- 2. पटना शहर में 3 जुलाई 1857 को हुए प्रसिद्ध विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप पटना के अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था और अंग्रेजों ने इस दंगे के पश्चात पीर अली खां को सरेआम फाँसी दे दी थी।
- 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में दानापुर से आए विद्रोही सिपाहियों, स्थानीय अफीम कर्मचारियों तथा असंतुष्ट जमींदारों की कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि इन जिलों में कमिश्नर विलियम टेलर की कठोर दमनकारी नीतियों के कारण विद्रोही गतिविधियों का पूर्णतः शमन हो चुका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के समय बिहार में पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा प्रमुख केंद्र थे। 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी के सिपाहियों ने विद्रोह किया और आरा पहुंचकर बाबू वीर कुंवर सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध मोर्चा लिया। पटना में 3 जुलाई 1857 को पीर अली खां के नेतृत्व में हुए विद्रोह में डॉ. लायेल मारा गया था, जिसके बाद पीर अली खां को अन्य विद्रोहियों के साथ फाँसी दे दी गई। इसके विपरीत, कथन 3 असत्य है क्योंकि मुजफ्फरपुर, छपरा और तिरहुत क्षेत्रों में भी दानापुर के विद्रोही सिपाहियों तथा स्थानीय लोगों के सहयोग से व्यापक विद्रोह फैला था और कमिश्नर विलियम टेलर के दमन के बावजूद विद्रोही सक्रिय रहे थे। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन का प्रसार अलवार (वैष्णव संतों) और नयनार (शैव संतों) द्वारा किया गया था, जिन्होंने जाति व्यवस्था और रूढ़िवादिता का विरोध करते हुए तमिल भाषा में अपने उपदेश दिए और भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को Ramananda (रामानंद) द्वारा प्रसारित किया गया था, जिन्होंने भक्ति के मार्ग को सभी जातियों और वर्गों के लिए खोल दिया तथा कबीर, रैदास और पीपा जैसे उनके शिष्य विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से संबंधित थे।
3. सूफी संतों (औलिया) का 'चिश्ती सिलसिला' भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, जिसकी स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने संगीत (समां) को ईश्वर की प्राप्ति का एक माध्यम माना तथा राजकीय संरक्षण से दूर रहना पसंद किया।
4. मध्यकालीन सूफी परंपरा में 'वहदत-उल-वजूद' (अस्तित्व की एकता) का सिद्धांत इब्न अल-अरबी द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसे भारतीय संदर्भ में सूफी संतों और अद्वैत वेदांत के दार्शनिक विचारों के बीच एक महत्वपूर्ण वैचारिक सेतु माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति और लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के साथ किए गए अपमानजनक व्यवहार ने भारतीय शासकों और जनमानस में गहरा असंतोष पैदा किया था।
2. सामाजिक और धार्मिक सुधारों के तहत अंग्रेजों द्वारा 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को उसकी पैतृक संपत्ति से वंचित करने के नियम को बदल दिया गया था, को रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म अपनाने को प्रोत्साहित करने वाला षड्यंत्र माना।
3. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों द्वारा भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण विध्वंस शामिल था, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में भारी भू-राजस्व व्यवस्था (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवाड़ी व्यवस्था) ने केवल किसानों को प्रभावित किया, जबकि पारंपरिक जमीदार और तालुकदार वर्ग इस आर्थिक शोषण से पूरी तरह अछूते रहे थे।
4. सेना के स्तर पर धार्मिक और सामाजिक कारणों से उपजा असंतोष भी इस विद्रोह का एक बड़ा कारक था, जिसमें 1856 का 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) शामिल था, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार विदेशों में भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मराठा प्रशासन में "पेशवा" का पद किससे संबंधित था?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले नेताओं तथा उनके दमन से संबंधित ब्रिटिश अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद — मौलवी अहमदullah शाह (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन)
2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर 콜िन कैंपबेल (दमन)
3. इलाहाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं जनरल नील (दमन)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
→
गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा भूमि के वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में राजकीय भूमि पर कृषि करने वाले व्यक्तिगत किसानों से लिया जाने वाला प्रमुख भू-कर 'उद्रंग' कहलाता था, जो सामान्यतः स्थायी कृषकों से वसूला जाता था, जबकि 'उपरिकर' एक अस्थायी कृषकों या बटाईदारों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर था।
2. अमरकोश में विभिन्न प्रकार की भूमियों का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार 'क्षेत्र' खेती के योग्य उपजाऊ भूमि को कहा जाता था, 'अप्राहत' बिना जोती गई जंगली भूमि थी, और 'वापस्त' निवास योग्य भूमि थी।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक इकाइयों में प्रांत को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, और भुक्तियों का विभाजन 'विषय' (ज़िलों) में होता था, जिनका प्रशासन 'विषयापति' नामक अधिकारी द्वारा चलाया जाता था।
4. गुप्त प्रशासन में भूमि-अनुदान (Land Grants) की प्रथा चरम पर थी, और इस काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों और मंदिरों को दिए जाने वाले कर-मुक्त भूमि अनुदान को 'अग्रहार' कहा जाता था, जिनके मामलों में शाही अधिकारियों का प्रवेश वर्जित होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.