BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दोहती थी, और इस काल में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र की ओर हो गया, जिससे कुरु और पांचाल जैसे बड़े जनपदों का उदय हुआ, तथा इस काल में लोहे के व्यापक प्रयोग को 'श्याम अयस' (Shyama Ayas) के रूप में ग्रंथों में उल्लेखित किया गया है।
  3. 3. शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में गंधार, केकय और मद्र जैसे उत्तर-पश्चिम के राज्यों के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे आंध्र और पुंड्र) का भी विस्तृत भौगोलिक विवरण मिलता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि उत्तर वैदिक काल के अंत तक आर्यों का भौगोलिक प्रभाव दक्षिण भारत तक पूरी तरह स्थापित हो चुका था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ऋग्वैदिक समाज में 'दुहितृ' शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय का दूध दोहने वाली (गाय दुहने वाली पुत्री) से था। इस काल में महिलाओं को सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने की स्वतंत्रता थी। कथन 2 सही है: उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज और उसके व्यापक प्रयोग ने कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिसे वैदिक साहित्य में 'श्याम अयस' या 'कृष्ण अयस' कहा गया है। कथन 3 गलत है: शतपथ ब्राह्मण और अन्य उत्तर वैदिक ग्रंथों में उत्तर-पश्चिम और मध्य देश (जैसे कुरु, पांचाल, कोशल, विदेह) का भौगोलिक विस्तार तो मिलता है, किंतु इस काल में दक्षिण भारत (जैसे आंध्र, चोल, केरल आदि) तक आर्यों की राजनीतिक या भौगोलिक स्थापना नहीं हुई थी; दक्षिण भारत का आर्यकरण महाजनपद काल के उत्तरार्ध और मौर्य काल के दौरान हुआ। वैदिक काल के विषय में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक सिद्धांतों, प्रमुख संतों तथा उनके संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानदेव) ने मराठी भाषा में 'भावार्थदीपिका' (ज्ञानेश्वरी) की रचना की, जो भगवद्गीता पर एक अत्यंत प्रसिद्ध टीका है, तथा उन्होंने महाराष्ट्र के 'वारकरी संप्रदाय' को मजबूत आधार प्रदान किया। 2. सूफी मत के अंतर्गत 'सुहरावर्दी सिलसिला' के संतों ने राजकीय सत्ता और सुल्तानों के दरबार से पूर्ण दूरी बनाए रखने की नीति का कड़ाई से पालन किया और कभी भी राज्य से किसी प्रकार की जागीर या आर्थिक सहायता स्वीकार नहीं की। 3. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धद्वैत वेदांत' के दर्शन का प्रतिपादन किया और कृष्ण भक्ति के 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना की, जिसके अनुसार ब्रह्म और जगत में कोई भेद नहीं है, बल्कि जगत ब्रह्म का ही शुद्ध और वास्तविक रूप है। 4. सूफी संतों में 'बेशरा' वे संत थे जो इस्लामिक शरीयत (कानून) के नियमों और आदेशों से बंधे नहीं थे और अपनी स्वतंत्र आध्यात्मिक अवस्था में जीवन व्यतीत करते थे, जबकि 'बाशरा' वे संत थे जो शरीयत के कानूनों का कठोरता से पालन करते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा और मुजफ्फरपुर) में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिन्हें बाद में ब्रिटिश अधिकारी विलियम टेलर के आदेश पर सरेआम फाँसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छातीनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा में बाबू कुंवर सिंह के साथ जा मिले। 3. आरा में बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में हुए संघर्ष के दौरान ब्रिटिश सेना के कैप्टन डनबर को पराजय का सामना करना पड़ा था, और कुंवर सिंह ने अपनी अद्भुत छापामार रणनीति से ब्रिटिश सेना को लगातार कड़ी चुनौती दी। 4. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोहियों का दमन करने के लिए ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर और मेजर विन्सेंट आयर ने आक्रामक सैन्य अभियान चलाए, जिसमें विद्रोहियों को तुरंत कुचल दिया गया और किसी भी क्षेत्र में समानांतर सरकार स्थापित नहीं हो सकी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में किसके शासनकाल को "चित्रकला का स्वर्ण युग" कहा जाता है? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुई घटनाओं और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्हें बाद में कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजीमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे आरा की ओर बढ़ गए, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। 3. मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोही गतिविधियों को संगठित करने और स्थानीय सिपाहियों से संपर्क स्थापित करने के आरोप में सरकारी कर्मचारी वारिस अली को गिरफ्तार कर फाँसी दी गई थी। 4. छपरा (सारण) और तिरहुत क्षेत्र में विद्रोहियों के दमन के दौरान कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के सभी वहाबी नेताओं को तुरंत रिहा कर दिया था, ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया था, जिससे किसानों की स्थिति केवल काश्तकारों (Tenants) या बटाईदारों तक सिमट कर रह गई थी। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में शुरू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' के अंतर्गत सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता होता था, जिसमें राजस्व की दर को पूरी तरह से स्थायी (Permanent) रखा गया था और इसमें भविष्य में कभी भी वृद्धि नहीं की जाने का प्रावधान था। 3. 'महालवारी व्यवस्था' को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व के भुगतान की सामूहिक जिम्मेदारी पूरे गाँव या महाल (गाँव के समूह) की होती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.