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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे और विभिन्न राजवंशों के दौरान हुए संस्थागत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में सबसे पहले 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालिस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया और 'इक्ता' प्रणाली को संस्थागत रूप प्रदान करते हुए राज्य स्तर पर वित्तीय व प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया।
- 2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में केंद्रीय सेना को नगद वेतन देने की प्रथा की शुरुआत की तथा सैनिकों का हुलिया लिखने और घोड़ों को दागने (दाग व हुलिया प्रथा) की कठोर प्रणाली लागू की ताकि सैन्य भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
- 3. मुहम्मद बिन तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार कृषि के विकास के लिए एक नवीन विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की, जिसके माध्यम से किसानों को तकावी (आगामी ऋण) प्रदान किया जाता था और सीधे राज्य की देखरेख में मॉडल फार्मिंग कराई जाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूरी तरह सही हैं। इल्तुतमिश ने अपने शासनकाल को सुदृढ़ करने के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' का गठन किया और साम्राज्य को प्रशासनिक इकाइयों (इक्ताओं) में विभाजित किया। अलाउद्दीन खिलजी पहला सुल्तान था जिसने सैनिकों को स्थायी रूप से नगद वेतन देने की शुरुआत की और सैन्य निरीक्षण के लिए 'दाग' और 'हुलिया' प्रथा अपनाई। वहीं, मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधारों के तहत 'दीवान-ए-कोही' नामक पृथक् कृषि विभाग की स्थापना की थी। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया था, तथा मुगल सम्राट के साथ होने वाले शाही बर्ताव और पदवी को समाप्त करने के लॉर्ड डलहौजी और लॉर्ड कैनिंग के निर्णयों ने भारतीय जनमानस में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा कर दिया था।
2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) था, जिसके माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपने पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण का षड्यंत्र माना।
3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की लैंड रेवेन्यू नीतियां—जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था—थीं, जिनके कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विघटन हुआ, कृषक वर्ग अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दब गया और विलासिता की वस्तुओं के आयात तथा भारतीय हस्तशिल्प व कपड़ा उद्योग के विनाश ने कारीगरों को बेरोजगार कर दिया।
4. विद्रोह के तत्काल पूर्व सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले सामाजिक-धार्मिक कारणों में वर्ष 1856 का 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) भी शामिल था, जिसके तहत बंगाल सेना के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे उस समय समाज में समुद्र पार जाना धर्म भ्रष्ट होना माना जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (Queen Victoria's Proclamation)' के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के नाम पर कर दिया गया तथा 'Governor-General of India' को 'Viceroy' (वायसराय) की नई उपाधि दी गई, जो सीधे ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी कैबिनेट मंत्री (भारत सचिव) के नियंत्रण में कार्य करता था।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1 नवंबर 1858) में यह स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें (Princely States) के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी, उनके 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को समाप्त कर दिया गया तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के नए भू-क्षेत्रों का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में यह भी घोषणा की गई कि बिना किसी भेदभाव और नस्ल के सभी योग्य भारतीयों को उनकी पात्रता के आधार पर उच्च प्रशासनिक सेवाओं (Civil Services) में नियुक्त किया जाएगा, तथा धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति अपनाई जाएगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में 'मंसबदारी प्रणाली' की शुरुआत की गई थी, जिसमें मीर बख्शी का विभाग मंसबदारों के वेतन और उनकी सैनिक टुकड़ियों के निरीक्षण के लिए उत्तरदायी था, किंतु 'जात' और 'सवार' पदों का स्पष्ट विभाजन सर्वप्रथम जहांगीर के शासनकाल में 'दो-अस्पा सिह-अस्पा' प्रणाली के माध्यम से किया गया था।
2. शाहजहां के शासनकाल में स्थापित 'चहारबाग' शैली और वास्तुकला में संगमरमर के प्रयोग के साथ-साथ मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (मासिक वेतन) पैमाने को लागू किया गया, जिसके अंतर्गत मनसबदारों को वर्ष के महीनों के आधार पर जागीर से आय प्राप्त होती थी।
3. औरंगजेब के शासनकाल में मराठा सरदारों और दक्षिण के शासकों को अपने पक्ष में मिलाने के लिए मनसबदारी व्यवस्था में 'दक्खिनी' (Deccani) अमीरों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि की गई, जिसके परिणामस्वरूप 'जागीरों का संकट' (Crisis of Jagirs) और तीव्र प्रशासनिक गतिरोध उत्पन्न हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक वस्तु के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता के कारण किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' का सिद्धांत सभी घटनाओं के कारण-और-प्रभाव (हेतु-प्रत्यय) पर आधारित होने की बात करता है।
2. बौद्ध धर्म ने वेदों की प्रामाणिकता और ईश्वर के अस्तित्व को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया, किंतु यज्ञों में होने वाली पशु-हिंसा और वर्ण व्यवस्था के कठोर नियमों का खंडन करते हुए 'मध्यम मार्ग' (अतार्गिक तपस्या और भोगविलास के बीच) का उपदेश दिया।
3. जैन धर्म में संलेखना (सल्लेखना) या संथारा पद्धति द्वारा स्वेच्छा से प्राण त्यागने के विधान को मान्यता दी गई है, जिसके तहत चंद्रगुप्त मौर्य ने भी श्रवणबेलगोला में अपने जीवन का अंत किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का कोई एक केंद्रीय, सर्वमान्य और सुसंगठित राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व नहीं था, तथा विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं में आपसी समन्वय और एक साझा भविष्य के भारत का राजनीतिक दृष्टिकोण पूरी तरह से गायब था।
2. ब्रिटिश सेना की तुलना में विद्रोहियों के पास न तो आधुनिक सैन्य तकनीक, हथियारों और रसद की पर्याप्त आपूर्ति थी और न ही उनके पास कोई पूर्व-नियोजित दीर्घकालिक रणनीतिक योजना थी, जिसके कारण वे लंबी लड़ाई लड़ने में असमर्थ रहे।
3. भारत के अधिकांश बड़े जमींदारों, साहूकारों, शिक्षित मध्यम वर्ग और अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे ग्वालियर के सिंधिया, हैदराबाद के निजाम और इंदौर के होलकर) ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय समर्थन किया।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वारा विद्रोह की कमान संभालने के बाद भारतीय सैनिकों को एक सशक्त और निर्णायक केंद्रीय नेतृत्व प्राप्त हो गया, जिससे अंग्रेजों के विरुद्ध सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों में अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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