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History of India
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वैदिक साहित्य और समाज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'गोत्र' शब्द का मूल अर्थ 'गोष्ठ' या वह स्थान था जहाँ कुल विशेष का मवेशी पाला जाता था, और इस काल में वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित न होकर कर्म और व्यवसाय पर आधारित थी।
- 2. उत्तर वैदिक काल में आते-आते यज्ञों का अनुष्ठान अत्यंत जटिल हो गया और ब्राह्मण ग्रंथों में 'पुरोहित' वर्ग का वर्चस्व स्थापित हो गया, जहाँ राजसूय और वाजपेय जैसे बड़े यज्ञ राजा के राजनीतिक अधिकार और संप्रभुता को सुदृढ़ करने के लिए किए जाते थे।
- 3. उपनिषद काल तक पहुँचते-पहुंचते भौतिकवादी कर्मकांडों और यज्ञीय संस्कृति के विरुद्ध वैचारिक प्रतिक्रिया स्वरूप 'आण्विक दर्शन' और 'श्रमण परंपरा' का बीजारोपण हुआ, तथा उपनिषदों में आत्मा (आत्मन्) और ब्रह्मांड (ब्रह्मन्) की एकता पर बल दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन वैदिक सभ्यता एवं साहित्य के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। ऋग्वैदिक काल में 'गोत्र' का अर्थ गोष्ठ या मवेशियों का बाड़ा था और वर्ण व्यवस्था लचीली थी जो कर्म पर आधारित थी। उत्तर वैदिक काल में यज्ञों की जटिलता बढ़ी और राजसूय, वाजपेय तथा अश्वमेध जैसे महायज्ञ राजा की संप्रभुता के प्रतीक बने। उपनिषदों ने कर्मकांडों के स्थान पर ज्ञान, मोक्ष, आत्मा और ब्रह्म के दार्शनिक स्वरूप को स्थापित किया। इस काल और साहित्य के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश प्रांतीय शासक और सामंत अपने खोए हुए अधिकारों या पेंशन की पुनः प्राप्ति के लिए लड़ रहे थे, जिसके कारण उनमें अखिल भारतीय स्तर की राजनीतिक दृष्टि और एक साझा प्रशासनिक विजन का पूर्ण अभाव था।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ) और तीव्र परिवहन (रेलवे) की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि भारतीय विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीय समन्वय था और न ही वे एक सामंजस्यपूर्ण सैन्य रणनीति के तहत एकजुट होकर लड़ सके।
3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों और शिक्षित मध्यम वर्ग ने विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया तथा अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य को शुरुआती हफ्तों में ही भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित जरूर किया गया था, किंतु उनकी वृद्धावस्था, अनिच्छा और सैन्य नेतृत्व क्षमता की कमी के कारण विद्रोह को कोई प्रभावी केंद्रीय और दिशा-निर्देशन नहीं मिल सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के समीप बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन का पूर्ण बहिष्कार किया था, क्योंकि कांग्रेस का स्पष्ट मानना था कि जब तक ब्रिटिश सरकार पूर्ण स्वराज्य या औपनिवेशिक स्वराज्य (Dominion Status) के प्रस्ताव को आधार नहीं बनाती, तब तक इस तरह की वार्ताओं में भाग लेना व्यर्थ है।
3. कराची अधिवेशन (1931), जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' पर अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव को स्वीकार किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) की शुरुआत की ताकि हिंद महासागर में पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित किया जा सके और व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण रखा जा सके।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 ई. में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया और भारतीयों के साथ विवाह की नीति को बढ़ावा दिया।
3. नूनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया तथा 1534 ई. में बेसिन के शासक बहादुर शाह से बेसिन और 1535 ई. में दीव के क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।
4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर में जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए जारी किए जाने वाले अनुज्ञप्ति पत्र को 'कार्टाज' (Cartaz) कहा जाता था, और इसके तहत मसालों के व्यापार पर एकाधिकार बनाए रखने के लिए अफीम एवं तंबाकू जैसे उत्पादों के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "चहार चमन" (Chahar Chaman) के लेखक कौन थे जो शाहजहाँ के सचिव थे?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा संचालित संघर्ष और सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाबू कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के बाद अपनी सैन्य रणनीति का विस्तार करते हुए मिर्जापुर, रीवा, बांदा और लखनऊ तक के अभियानों का नेतृत्व किया और ग्रैंड ट्रंक रोड पर ब्रिटिश संचार व्यवस्था को पूरी तरह से छिन्न-भिन्न कर दिया था।
2. ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर ने आरा के समीप बीबीगंज के युद्ध में कुंवर सिंह की सेना को पराजित कर जगदीशपुर स्थित उनके महल और हथियारों के कारखाने को नष्ट कर दिया था, जिसके उपरांत कुंवर सिंह ने सफल छापामार युद्ध रणनीति अपनाई।
3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध और समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन तब तक जारी रखा, जब तक कि उन्हें नेपाल की पहाड़ियों में शरण नहीं लेनी पड़ी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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