BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
18 views

सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पाकालीन नगरों में सामान्यतः 'ग्रिड पद्धति' (Grid System) का अनुसरण किया जाता था, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर दो या अधिक भागों (पश्चिमी दुर्ग और पूर्वी टीला) में विभाजित थे, किंतु अपवादस्वरूप 'धोलावीरा' नगर तीन भागों (किला, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था और यहाँ अद्वितीय जल प्रबंधन प्रणाली के साक्ष्य मिले हैं।
  2. 2. लोथल और चान्हूदो दोनों ही सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक नगर थे, जहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) पाए गए हैं, किंतु लोथल में कृत्रिम गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य मिलते हैं जबकि चान्हूदो एकमात्र ऐसा स्थल था जो बिना दुर्ग (Fortification) के बसा हुआ एक पूर्णतः शिल्प-उत्पादन केंद्र था।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक उत्कीर्ण पशु 'एकसृंगीय जानवर' (Unicorn) है, तथा इस सभ्यता में लोहे और घोड़े के प्रयोग के स्पष्ट, व्यापक और निर्विवाद पुरातात्विक साक्ष्य सभी प्रमुख परिपक्व स्थलों से प्राप्त होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के नगरों की मुख्य विशेषता ग्रिड प्रणाली पर आधारित समकोण पर काटती सड़कें थीं और अधिकांश नगर दो भागों में बंटे थे, जबकि धोलावीरा तीन भागों में विभाजित था और यहाँ उत्कृष्ट जल संचयन प्रणाली पाई गई है। कथन 2 भी सही है क्योंकि लोथल और चान्हूदो मनके बनाने के प्रमुख केंद्र थे, लोथल में गोदीबाड़ा (डॉकयार्ड) था और चान्हूदो एकमात्र ऐसा स्थल था जहाँ कोई दुर्ग नहीं था। कथन 3 गलत है क्योंकि सिंधु सभ्यता के लोग लोहे से परिचित नहीं थे (लोहा उत्तर वैदिक काल में आया), और मुहरों पर सबसे अधिक 'एकसृंगीय पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, किंतु घोड़े के व्यापक और निर्विवाद साक्ष्य परिपक्व हड़प्पा काल के मुख्य शहरी केंद्रों से नहीं बल्कि सतह से ऊपर या सीमित संदर्भों में ही मिले हैं, तथा लोहे का अस्तित्व पूर्णतः अनुपस्थित था। विकिपीडिया संदर्भ
Share:

Related Questions

→ बिहार में 1857 के महान विद्रोह के महान सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आरा पर विजय प्राप्त करने के बाद वीर कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश में बलिया के निकट गंगा नदी को पार करते हुए आजमगढ़ के ब्रिटिश अधिकारियों को पराजित किया था और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपनी अंतिम सफल सैन्य गतिविधि के रूप में जगदीशपुर वापस लौटते समय अप्रैल 1858 में कैप्टन ली ग्रांड की सेना को पूरी तरह खदेड़ दिया था। 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर रेंज) को अपना सुरक्षित अड्डा बनाते हुए ब्रिटिश सेना के खिलाफ एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का संचालन किया था। 3. अमर सिंह द्वारा कैमूर की पहाड़ियों से संचालित इस समानांतर प्रतिरोध और प्रशासन को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश जनरल एसाइल (Douglas) और कमिश्नर सैमुअल्स ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया, जिसके तहत उनके सहयोगियों को पकड़कर कठोर दंड दिया गया, किंतु अमर सिंह ब्रिटिश गिरफ्त से अंत तक दूर रहे और नेपाल की तराई में उनकी मृत्यु हुई। 4. वीर कुंवर सिंह ने अपनी इस संपूर्ण सैन्य यात्रा के दौरान ब्रिटिश सेनाओं के पास आधुनिक हथियारों और तोपखाने की कमी का लाभ उठाते हुए केवल पारंपरिक भालों और तलवारों का उपयोग किया था, और कभी भी ब्रिटिश सेना से आधुनिक बंदूकों या तोपों का अधिग्रहण नहीं किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भक्ति आंदोलन और सूफी सिलसिले के विकास तथा उनके वैचारिक एवं दार्शनिक पक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले नयनार (शिव भक्त) और आलवार (विष्णु भक्त) संतों ने जाति व्यवस्था और वैदिक कर्मकांडों का पुरजोर समर्थन किया तथा संस्कृत भाषा को ही अपने उपदेशों का एकमात्र माध्यम बनाया। 2. सूफी संतै हजरत निजामुद्दीन औलिया के समकालीन अमीर खुसरो ने भारतीय संगीत और फारसी संगीत शैलियों का अनूठा समन्वय किया तथा 'कव्वाली' शैली के विकास में विशेष योगदान दिया। 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को रामानंद द्वारा प्रसारित किया गया, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए शूद्रों और महिलाओं को भी अपने शिष्यों के रूप में स्वीकार किया। 4. सूफी संतों का 'चिश्ती सिलसिला' संगीत (समां) और नृत्य को ईश्वर-प्राप्ति का साधन मानता था, जबकि 'सुहरावर्दी सिलसिला' राज्य के नियंत्रण और राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव की नीति का पालन करता था और सुल्तानों से मिलने वाले उपहारों को अस्वीकार कर देता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनकी विभिन्न विचारधाराओं एवं सिलसिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती सिलसिले के संतों ने राज्य के राजनीतिक मामलों और राजकीय संरक्षण (पैट्रोनटेज) से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने स्पष्ट रूप से सुल्तानों के दरबार में जाने से इंकार करते हुए 'मेरे घर के दो दरवाजे हैं, यदि सुल्तान एक से प्रवेश करेगा तो मैं दूसरे से बाहर चला जाऊंगा' की नीति अपनाई। 2. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय सहायता, जागीरों और बड़े पदों को स्वीकार करने में कोई परहेज नहीं किया, तथा इस सिलसिले का मुख्य कार्यक्षेत्र सिंध और मुल्तान का क्षेत्र था। 3. कादिरिया सिलसिले के संस्थापक अब्दुल कादिर जिलानी थे, और भारत में इस सिलसिले के प्रसार का श्रेय शाह नियाज और मियाँ मीर को जाता है, जिन्होंने मुगल राजकुमार दारा शिकोह को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया था। 4. नक्सबंदी सिलसिले की स्थापना ख्वाजा बाकी بالله ने भारत में की थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-अलिसानी) ने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और 'दीन-ए-इलाही' नीति की कड़ी आलोचना करते हुए रूढ़िवादी इस्लाम के पुनरुत्थान पर जोर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → महात्मा गांधी के भारत आगमन के उपरांत उनके शुरुआती सत्याग्रह आंदोलनों (चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गांधीजी जब चंपारण पहुँचे, तो वहाँ तिनकथा प्रणाली के तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था, जिसे समाप्त करने के लिए सरकार ने 'चंपारण कृषि समिति' का गठन किया जिसमें गांधीजी स्वयं एक सदस्य थे। 2. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) में मिल मालिकों और मजदूरों के बीच 'प्लague बोनस' को लेकर विवाद था, जहाँ गांधीजी ने पहली बार भारत में भूख हड़ताल (Hunger Strike) का सफल प्रयोग किया और अंततः ट्रिब्यूनल द्वारा मजदूरों को 35 प्रतिशत बोनस देने का निर्णय सुनाया गया। 3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) गुजरात में फसल बर्बाद होने के बावजूद राजस्व वसूली के विरोध में किया गया था, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक जैसे नेताओं ने गांधीजी का सहयोग किया और सरकार को यह निर्देश देना पड़ा कि लगान केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाए जो भुगतान करने में सक्षम हैं। 4. इन तीनों आंदोलनों में चंपारण सत्याग्रह अखिल भारतीय स्तर का पहला सत्याग्रह था, जबकि खेड़ा आंदोलन में गांधीजी ने पहली बार असहयोग के हथियार का प्रयोग किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "साहिबे तौजी" (Sahib-e-Tawji) का पद किससे संबंधित था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.