BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
20 views

गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में 'भूमि छिद्र न्याय' (Bhumichhidra Nyaya) का तात्पर्य उस न्यायिक प्रक्रिया से था जिसके अंतर्गत बंजर या बेकार पड़ी भूमि को बिना कर दिए कृषि योग्य बनाने वाले व्यक्ति को उस पर पूर्ण स्वामित्व का अधिकार मिल जाता था।
  2. 2. सातवाहन काल में 'अग्रहार' व्यवस्था के तहत ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि या गाँवों के दान की परंपरा का व्यापक प्रसार हुआ, जिससे प्रशासनिक और आर्थिक विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला।
  3. 3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्कों को 'दिनार' कहा जाता था, और हूणों के आक्रमण के कारण आर्थिक संकट उत्पन्न होने के कारण गुप्त शासकस्कन्दगुप्त ने सोने के सिक्कों में सोने की शुद्धता को अत्यधिक बढ़ा दिया था ताकि व्यापारिक विश्वास बहाल किया जा सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: गुप्तकाल में 'भूमि छिद्र न्याय' का उल्लेख कानूनी ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है, जिसके अनुसार जो व्यक्ति बंजर भूमि को पहली बार तोड़कर कृषि योग्य बनाता था, उसे उस भूमि पर स्थायी अधिकार प्राप्त होता था। कथन 2 सही है: मौर्योत्तर काल विशेषकर सातवाहन वंश के शासनकाल में धार्मिक और बौद्ध संप्रदायों तथा ब्राह्मणों को कर-मुक्त भूमि दान देने (अग्रहार व्यवस्था) की प्रथा जोर पकड़ने लगी, जिससे सामंती प्रवृत्तियों का बीजारोपण हुआ। कथन 3 गलत है: स्कन्दगुप्त और बाद के गुप्त शासकों के समय हूणों के आक्रमणों और आर्थिक दबाव के कारण सोने के सिक्कों में सोने की मात्रा (शुद्धता) घटने लगी थी, न कि बढ़ाने की स्थिति आई थी। इस कालखंड के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस का परिचय दिया और किले की रक्षा करते हुए अंततः तात्या टोपे की सेना की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया। 2. कालपी की पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया, जहाँ उन्होंने सिंधिया शासक को पराजित कर ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया तथा नाना साहब को पेशवा घोषित किया। 3. सर ह्यूरोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने ग्वालियर पर पुनः आक्रमण किया, और 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जिसके बाद ह्यूरोज़ ने उन्हें 'भारतीय विद्रोहियों में एकमात्र सर्वश्रेष्ठ और सबसे बहादुर सैन्य नेता' कहा था। 4. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे नेपाल की पहाड़ियों की ओर सफलतापूर्वक निकल गए और ब्रिटिश काल के अंत तक अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आए, वहीं रानी लक्ष्मीबाई के निष्ठावान सेनापति मान सिंह ने अंग्रेजों से संधि कर ली थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां द्वारा किए गए नेतृत्व तथा ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार एवं राजनीतिक रणनीतिकार थे। 2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का अत्यंत कुशलता से संचालन किया तथा बाद में ग्वालियर और कालपी के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा सैन्य प्रतिरोध जारी रखा। 3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के बाद हुए 'सती चौरा घाट नरसंहार' (बीबीघर नरसंहार) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनानायक जनरल कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया और विद्रोह का पूर्ण दमन किया। 4. विद्रोह के असफल होने के बाद नाना साहब और अजीमुल्ला खां नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि तात्या टोपे को कभी भी ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ा नहीं जा सका और वे जीवनभर अज्ञातवास में रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → अकबर ने अपनी टकसालों का सर्वोच्च अधिकारी किसे नियुक्त किया था? → वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे 'स्वदेशी आंदोलन' के दौरान घटित निम्नलिखित प्रमुख घटनाओं तथा उनके प्रभावों के संदर्भ में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था। 2. जिस दिन (16 अक्टूबर 1905) बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोकादिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव प्रभात फेरियां निकालीं और रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे के हाथों में राखी बांधकर सांप्रदायिक सद्भाव व अखंडता का प्रदर्शन किया तथा 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Constructive Programme) पर भी जोर दिया गया, जिसके तहत बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई और इसके प्रथम प्राचार्य के रूप में अरबिंदो घोष को नियुक्त किया गया था। 4. बंगाल विभाजन के विरोध में ब्रिटिश वस्तुओं और शिक्षा संस्थानों के बहिष्कार का यह आंदोलन केवल बंगाल तक ही सीमित रहा, क्योंकि देश के अन्य प्रांतों के नेताओं (जैसे पंजाब में लाला लाजपत राय और मद्रास में चिदंबरम पिलई) ने इसे राष्ट्रीय महत्व का आंदोलन मानने से इंकार कर दिया था। → माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के प्रावधानों तथा उनके क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और हिंदू बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान करने का अधिकार दिया गया था। 2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और सिलहट (असम) में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को शामिल होने का निर्णय करने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) आयोजित किए गए थे, जिसमें NWFP के जनमत संग्रह में खान अब्दुल गफ्फार खान के 'खुदाई खिदमतगार' आंदोलन द्वारा बहिष्कार किए जाने के कारण पाकिस्तान के पक्ष में बहुमत आया था। 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के माध्यम से 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमीनियनों की स्थापना का प्रावधान किया गया तथा ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता को समाप्त करते हुए दोनों डोमीनियनों की संविधान सभाओं को अपने देश के लिए पूर्ण संप्रभु कानून बनाने की शक्ति प्रदान की गई। 4. इस अधिनियम के तहत लॉर्ड माउंटबेटन को भारत और पाकिस्तान दोनों नए स्वतंत्र देशों का संयुक्त रूप से प्रथम गवर्नर-जनरल नियुक्त किया गया था, जो दोनों देशों के बीच प्रशासनिक और सैन्य संपत्तियों के बटवारे की निगरानी करने वाले एकमात्र ब्रिटिश अधिकारी थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.