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History of India
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के दौरान प्रशासनिक संस्थाओं, सैन्य सुधारों और आर्थिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बलबन ने 'दीवान-ए-आरिज' (सैन्य विभाग) को पुनर्गठित किया और मंगोल आक्रमणों के खतरे से निपटने के लिए उत्तर-पश्चिम सीमा पर स्थित किलों की मरम्मत कराते हुए अनुभवी सरदारों को वहाँ नियुक्त किया, किंतु उसने इल्तुतमिश द्वारा स्थापित 'तुर्कान-ए-चहलगानी' के प्रभाव को समाप्त करने के लिए उसके सदस्यों को या तो उच्च पदों से हटा दिया या जहर देकर मरवा दिया।
  2. 2. जलालुद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में 'दीवान-ए-वकूफ़' नामक एक नए विभाग की स्थापना की, जिसका मुख्य कार्य राज्य के आय-व्यय और वित्तीय मामलों के दस्तावेजों की जाँच करना तथा पिछले बकाए खातों का हिसाब रखना था।
  3. 3. गयासुद्दीन तुगलक ने कृषि सुधारों के तहत भू-राजस्व की दर को कम करते हुए उपज का एक-तिहाई (33 प्रतिशत) हिस्सा तय किया तथा किसानों से जबरन कर वसूली बंद कर दी, लेकिन साथ ही उसने यह नियम भी बनाया कि किसी भी वर्ष में राजस्व में दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं की जाएगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ग्यासुद्दीन बलबन ने सुल्तान की शक्ति को सर्वोपरि बनाने के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालिस गुलाम सरदारों का दल) के प्रभाव को पूरी तरह कुचल दिया, क्योंकि वे सुल्तान के लिए निरंतर खतरा बने हुए थे। उसने सैन्य विभाग 'दीवान-ए-आरिज' को मजबूत किया। कथन 2 गलत है: 'दीवान-ए-वकूफ़' विभाग की स्थापना जलालुद्दीन खिलजी ने नहीं, बल्कि अलाउद्दीन खिलजी के उत्तराधिकारी या उसके अंतिम समय में नहीं बल्कि बाद में जलालुद्दीन द्वारा नहीं बल्कि खिलजी वंश के काल में अलग संदर्भ में थी, जबकि 'दीवान-ए-वकूफ़' की स्थापना जलालुद्दीन खिलजी के शासनकाल में नहीं बल्कि जलालुद्दीन के भतीजे और उत्तराधिकारी अलाउद्दीन खिलजी के शुरुआती दौर में या विशेष रूप से जलालुद्दीन के शासनकाल में इसके गठन का उल्लेख मिलता है, किंतु इस विभाग की स्थापना जलालुद्दीन खिलजी द्वारा ही की गई थी, लेकिन विकल्प में विवरण के अनुसार जलालुद्दीन ने 'दीवान-ए-वकूफ़' की स्थापना की थी जिसके प्रथम प्रमुख फखरुद्दीन थे। (यहाँ कथन 2 तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन जलालुद्दीन ने 'दीवान-ए-वकूफ़' की स्थापना की थी, तथा 'दीवान-ए-मुस्तकखराज' अलाउद्दीन ने बनाया था)। चलिए कथन 3 को देखते हैं: गयासुद्दीन तुगलक ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए 'रस्म-ए-मियान' (मध्यम मार्ग) की नीति अपनाई, जिसके तहत भू-राजस्व की दर को उपज का 1/11 से 1/10 भाग तक बढ़ाया गया और यह निर्देश दिया गया कि राजस्व में एक बार में 10 से 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि न की जाए, और उसने किसानों पर से कठोरता कम की। इस प्रकार कथन 1 और 3 सही हैं, और अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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