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History of India
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ग़दर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन (1913-1915) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सोहन सिंह भकना की अध्यक्षता में स्थापित 'पसिफिक कोस्ट हिन्दुस्तान एसोसिएशन' ही आगे चलकर 'ग़दर पार्टी' के रूप में प्रसिद्ध हुई, जिसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) के 'युगांतर आश्रम' में बनाया गया था।
  2. 2. ग़दर पार्टी ने अपने उद्देश्यों के प्रचार के लिए उर्दू, गुरुमुखी और गुजराती जैसी विभिन्न भाषाओं में 'ग़दर' साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया, किंतु इस अखबार के पहले पृष्ठ पर अनिवार्य रूप से 'अंग्रेज़ी राज का दुश्मन' (An Enemy of the British Rule) शीर्षक छापा जाता था।
  3. 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर ग़दर पार्टी के नेताओं ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह (Ghadar Mutiny) की योजना बनाई और फरवरी 1915 में पंजाब तथा अन्य छावनियों में विद्रोह का असफल प्रयास किया, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने लाहौर षड्यंत्र मुकदमे के तहत कई क्रांतिकारियों को मृत्युदंड दिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोहन सिंह भकना के नेतृत्व में 'पसिफिक कोस्ट हिन्दुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में 'ग़दर पार्टी' कहा गया। इसका मुख्यालय 'युगांतर आश्रम' था। कथन 2 गलत है: 'ग़दर' साप्ताहिक पत्र मुख्य रूप से उर्दू और गुरुमुखी (बाद में पश्तो और गुजराती के कुछ अंक भी) में प्रकाशित होता था, किंतु इसके हर अंक के शीर्ष पर 'अंग्रेज़ी राज का दुश्मन' नहीं, बल्कि 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' (An Enemy of the British Rule की जगह यह इसका शाब्दिक/वैचारिक अर्थ था, लेकिन मुख्य रूप से अखबार का शीर्षक 'ग़दर' और उपशीर्षक 'अंग्रेज़ी राज का दुश्मन' के रूप में जाना जाता है, परंतु गुजराती भाषा में इसके नियमित प्रकाशन का व्यापक साक्ष्य नहीं मिलता; इसके अलावा ऐतिहासिक रूप से यह पत्र मुख्य रूप से उर्दू और गुरुमुखी लिपि में ही निकला था)। सटीक रूप से, ग़दर पार्टी के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 3 सही है: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ग़दर पार्टी के नेताओं (जैसे रास बिहारी बोस और करतार सिंह सराभा) ने भारत लौटकर फरवरी 1915 में ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई थी, जो मुखबिरी के कारण विफल हो गई और लाहौर षड्यंत्र केस चलाया गया।
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