त्वरित लिंक्स
History of India
17 views
सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के दौरान विभिन्न पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त विशिष्ट अवशेषों, व्यापारिक गतिविधियों और उनकी सामाजिक-आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चान्हूदो एकमात्र ऐसा सैंधव स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के गढ़ (Citadel) के अवशेष नहीं मिले हैं, और यह स्थल मुख्य रूप से मनके बनाने, सीप की कटाई तथा मुहर निर्माण जैसे शिल्प उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र था।
- 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह स्थल फारस की खाड़ी और मेसोपोटामिया के साथ होने वाले समुद्री व्यापार का एक प्रमुख बंदरगाह था, जहाँ से फारस की मुहरें भी प्राप्त हुई हैं।
- 3. बनावली (हरियाणा) से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों में पक्की मिट्टी (Terracotta) से बने हल का एक प्रतिरूप मिला है, तथा इस स्थल की नगर योजना सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों की तरह पूरी तरह से ग्रिड पद्धति (Grid System) पर आधारित थी और यहाँ की जल निकासी व्यवस्था अत्यंत उन्नत थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि चान्हूदो (Chanhudaro) एकमात्र ऐसा प्रमुख हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ किसी भी प्रकार के गढ़ (Citadel) के निर्माण के साक्ष्य नहीं मिले हैं और यह शिल्प कला के लिए प्रसिद्ध था। कथन 2 सही है क्योंकि लोथल (Lothal) से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) से यह स्पष्ट होता है कि यह एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था जो विदेशी व्यापार से जुड़ा था। कथन 3 गलत है क्योंकि बनावली की नगर योजना सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों (जैसे हड़प्पा या मोहनजोदड़ो) की तरह सख्त 'ग्रिड पद्धति' पर आधारित नहीं थी, बल्कि यहाँ की गलियाँ और सड़कें अनियमित तथा अरीय (Radial) विन्यास को दर्शाती हैं। हड़प्पा सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में गहरी असुरक्षा और राजनीतिक असंतोष फैल गया।
2. कंपनी प्रशासन द्वारा वर्ष 1856 में 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) पारित किया गया, जिसके तहत भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार (Overseas) सेवा करना अनिवार्य कर दिया गया, जिससे पारंपरिक हिंदू सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचा और इसे जातिभ्रष्ट होने का कारण माना गया।
3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिससे बड़ी संख्या में बुनकर और कारीगर बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने के लिए बाध्य हो गए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
4. ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म परिवर्तन की खुली छूट देना, अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना और सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध कानून बनाना रूढ़िवादी भारतीय समाज के लिए धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप माना गया, जिससे विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए संघर्ष के दौरान एक अफीम एजेंट डॉक्टर लॉयल मारा गया था, जिसके फलस्वरुप कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर पीर अली खान को अन्य विद्रोहियों के साथ सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को ब्रिटिश सेना के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे आरा (शाहबाद) जा पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्र में विद्रोह के संचालन में कोई भी स्थानीय नागरिक या सरकारी कर्मचारी सक्रिय नहीं था, और वहाँ का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण बिना किसी प्रतिरोध के सीधे ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के सुरक्षित नियंत्रण में बना रहा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर. सी. मजूमदार
2. "यह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें ब्रिटिश शासन के प्रति कोई राजनीतिक दूरदर्शिता या राष्ट्रीय भावना नहीं थी।" — सर जॉन सीले
3. "यह सुनियोजित राष्ट्रीय षड्यंत्र था, जिसे विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक सुसंगत रणनीति के तहत चलाया गया था।" — वी. डी. सावरकर
4. "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था, जहाँ अंग्रेजों का शासन बनाए रखना मानवता और प्रगति के लिए अनिवार्य था।" — टी. आर. होम्स
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
→
यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों में सबसे पहले पुर्तगाली आए और सबसे अंत में गए, तथा वर्ष 1510 में अल्बुकर्क ने बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा छीनकर पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक होने का गौरव प्राप्त किया।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा वर्ष 1600 में चार्टर प्रदान किया गया था, किंतु कैप्टन हॉकिंस के सूरत पहुँचने से पहले ही अंग्रेजों ने वर्ष 1611 में मसूलीपट्टम में अपनी प्रथम (अस्थाई) फैक्ट्री स्थापित कर ली थी।
3. फ्रांसीसी कंपनी 'इंडे ओरिएंटल' की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, तथा फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में वर्ष 1668 में सूरत में स्थापित की थी।
4. बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की सुदृढ़ स्थापना से पूर्व अंग्रेजों को औरंगजेब के शासनकाल में वर्ष 1698 में सुतानती, कालिकाट और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारी प्राप्त हुई, जिनके समेकन से आधुनिक कलकत्ता शहर की नींव पड़ी और जहाँ फोर्ट विलियम किले का निर्माण किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
किस बहमनी राज्य को अंततः मुगल सम्राट औरंगजेब ने 1686-87 ई. में जीता था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.