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History of India
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके विरोध में संचालित 'स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन' के विभिन्न पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की विधिवत घोषणा जुलाई 1905 में की गई थी, और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक सुविधा को इसका मुख्य आधार बताया था, किंतु इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाल में उभर रही उग्र राष्ट्रवादी चेतना को विभाजित करना और हिंदुओं व मुसलमानों के मध्य सांप्रदायिक खाई चौड़ी करना था।
- 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, जिसके तहत ब्रिटिश वस्तुओं के साथ-साथ सरकारी शिक्षण संस्थानों और उपाधियों का भी त्याग करने का आह्वान किया गया।
- 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुनरुत्थान में साहित्य, संगीत और कला ने अभूतपूर्व भूमिका निभाई, जिसके तहत रबींद्रनाथ ठाकुर (टैगोर) द्वारा रचित गीत 'आमार सोनार बांग्ला' को इस आंदोलन का मुख्य स्वर बनाया गया और बाद में यही गीत स्वतंत्र बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान बना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा जुलाई 1905 में की गई थी और लॉर्ड कर्जन ने इसके पीछे प्रशासनिक अक्षमता और प्रांत के बड़े आकार का तर्क दिया था, जबकि इसका वास्तविक उद्देश्य राजनीतिक रूप से जागरूक बंगाल को कमजोर करना था। कथन 2 गलत है क्योंकि 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में हुए सम्मेलन में केवल 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था, किंतु इस शुरुआती चरण में उदारवादियों के प्रभाव के कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों और अदालतों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय अनिवार्य नहीं बनाया गया था; यह बाद के उग्रवादी चरम चरणों में व्यापक हुआ। कथन 3 सही है, इस आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक मोर्चे पर अभूतपूर्व चेतना आई और रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित 'आमार सोनार बांग्ला' इस आंदोलन का प्रेरणास्त्रोत बना, जिसे आगे चलकर बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रगान बनाया। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता से संघर्ष किया और अपने सुसज्जित संरक्षकों व टोपे की सहायता से झाँसी बचाने में सफल रहीं, जिसके बाद उन्होंने कालपी की ओर प्रस्थान किया।
2. झाँसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में सैन्य शक्ति संगठित की और ग्वालियर के सिंधिया शासक को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब को पेशवा घोषित किया गया था।
3. ग्वालियर के पतन के अंतिम निर्णायक युद्ध (मुरार या कोटा-की-सराय का युद्ध) में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे बच निकलने में सफल रहे और बाद में एक स्थानीय जमींदार के विश्वासघात के कारण पकड़े गए तथा उन्हें शिवपुरी में फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के विभिन्न पक्षों (आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'निष्क़' (Nishka) मूल रूप से गले में पहना जाने वाला एक प्रकार का बहुमूल्य आभूषण था, किंतु उत्तर वैदिक काल में आते-आते यह विनिमय के साधन और एक निश्चित भार के माप के रूप में सिक्का या मुद्रा के रूप में प्रयुक्त होने लगा।
2. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों प्रमुख क्रियाओं — जुताई (कर्षण), बुवाई (वपन), कटाई (लवन) और मड़ाई (मर्दन) — का विस्तृत उल्लेख मिलता है, तथा इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा के माध्यम से आर्यों के सदाानीरा (गंडक) नदी तक पूर्व की ओर विस्तार का विवरण प्राप्त होता है।
3. ऋग्वेद में वर्णित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (वर्तमान रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कुल के राजा सुदास ने त्रत्सु और अन्य दस जनजातियों के संघ को पराजित किया था, और इस युद्ध का मुख्य कारण पुरोहित पद से वशिष्ठ को हटाकर विश्वामित्र को नियुक्त करना था।
4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'आरण्यक' उन दार्शनिक और रहस्यवादी ग्रंथों को कहा जाता है जिन्हें मुख्य रूप से एकांत जंगलों में पढ़ा जाता था, और ये यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर उनके दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों की व्याख्या करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में चित्रकला का स्वर्ण युग:
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मध्यकालीन भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों तथा उनके दार्शनिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' (Dualism) के दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और ब्रह्म (ईश्वर) पूर्णतः पृथक् और स्वतंत्र अस्तित्व रखते हैं, तथा मुक्ति का एकमात्र मार्ग केवल भगवान विष्णु की अनन्य भक्ति और उनकी कृपा प्राप्ति है।
2. सूफी सिलसिलों में 'सुह्रवर्दी सिलसिला' चिश्ती सिलसिले के विपरीत राज्य के संरक्षण और राजकीय अनुदानों को स्वीकार करने में विश्वास रखता था, तथा उनके संत शाही दरबारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते थे।
3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और नामदेव ने ऊंच-नीच के भेदभाव का विरोध करते हुए पंढरपुर के विट्ठल (विठोबा) की भक्ति पर विशेष बल दिया, किंतु उन्होंने कठोर ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का पूर्ण समर्थन किया और कभी भी जातिगत समानता का उपदेश नहीं दिया।
4. कबीर और नानक जैसे निर्गुण संत ने जाति व्यवस्था, मूर्तिपूजा और बाहरी आडंबरों का खंडन करते हुए एक निराकार, सर्वव्यापी और अजस्र ईश्वर की उपासना पर जोर दिया, तथा उनकी वाणी को गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार और उनके संस्थापकों/सुधारकों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का खंडन करते हुए उपनिषदों के अद्वैतवादी वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की स्थापना करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का पूर्णतः बहिष्कार किया तथा वेदों की अचूकता और infallibility को अस्वीकार कर दिया।
3. वर्ष 1875 मेंMadam Blavatsky और कर्नल ओल्काट द्वारा स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' ने प्राचीन हिंदू धर्म, दर्शन, पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया और बाद में एनी बेसेंट के नेतृत्व में इसने भारत में तीव्र गति पकड़ी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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