BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
3 views

सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और पुर्तगालियों के मध्य संबंधों में आए बदलाव तथा भारत में यूरोपीय व्यापारिक बस्तियों की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1661 में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन से होने के फलस्वरूप अंग्रेजों को दहेज के रूप में 'बॉम्बे' (मुंबई) द्वीप प्राप्त हुआ, जिसे बाद में चार्ल्स द्वितीय ने मात्र दस पाउंड वार्षिक किराए पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था।
  2. 2. पुर्तगालियों ने भारत के पश्चिमी तट पर अपने व्यापारिक एकाधिकार को सुरक्षित रखने के लिए 'कार्टाज-कामीडा' (Cartaz-Cadeia) प्रणाली लागू की थी, जिसके तहत किसी भी भारतीय या एशियाई जहाज को पुर्तगाली लाइसेंस के बिना अरब सागर या हिंद महासागर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी।
  3. 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में बिना किसी कर (चुंगी) के व्यापार करने का विशेष अधिकार वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी किए गए प्रसिद्ध 'शाही फरमान' के माध्यम से प्राप्त हुआ था, जिसे समकालीन इतिहासकार ओरम (Orme) ने कंपनी का 'मैग्नाकार्टा' कहा था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1661 में ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगेंजा से हुआ था, जिसके तहत अंग्रेजों को दहेज में बॉम्बे मिला और 1668 में इसे कंपनी को दे दिया गया। पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क द्वारा हिंद महासागर में व्यापार पर नियंत्रण के लिए 'कार्टाज' प्रणाली लाई गई थी। साथ ही, 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को दिए गए फरमान को कंपनी का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध मतों और कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - आर.सी. मजूमदार 2. "यह विशुद्ध रूप से एक देशभक्तिपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम था, जो विदेशी शासन के विरुद्ध सुनियोजित राष्ट्रीय विद्रोह के रूप में लड़ा गया था" - वी.डी. सावरकर 3. "यह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था, जिसे भारतीय जनता द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए अंतिम युद्ध के रूप में लड़ा गया था" - बेंजामिन डिजरायली 4. "यह मूलतः सिपाहियों का विद्रोह था, जिसका चरित्र पूरी तरह से सैनिक था और इसमें राष्ट्रीय भावना का पूर्ण अभाव था" - सर जॉन लॉरेन और सी.आर. रीस उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था जिसने "सहायक संधि" (Subsidiary Alliance) का विस्तार किया? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिनके विद्रोह का मुख्य केंद्र एक स्थानीय अफीम की कोठी और दुकान थी, और कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार कर सीधे शाहबाद (आरा) पहुंचे, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में एक सशक्त सैन्य गठबंधन का निर्माण किया। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोहियों के दमन के लिए ब्रिटिश सरकार ने किसी भी सैन्य कार्रवाई से परहेज किया क्योंकि वहाँ के स्थानीय जमींदारों ने पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए विद्रोहियों को शरण देने से इंकार कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन एवं इसके परिणामस्वरूप शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा सर्वप्रथम लॉर्ड कर्जन द्वारा 20 जुलाई 1905 को की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित कर 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई थी। 2. 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन के प्रभावी होने के दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, तथा रविंद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर इस दिन 'राखी बंधन दिवस' मनाकर हिंदू और मुसलमानों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी थी। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, और इसके प्रथम अध्यक्ष अरबिंदो घोष को बनाया गया था। 4. इस आंदोलन के दौरान केवल विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार ही नहीं किया गया, बल्कि पारंपरिक भारतीय लोक कलाओं, मेलों, और 'आमार सोनार बांग्ला' जैसे गीतों के माध्यम से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिला था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध के क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और विद्रोही सैनिकों के सबसे प्रमुख सैन्य रणनीतिकारों में उभरे। 3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने बेगम हजरत महल के महलों पर अधिकार कर लिया, जिसके पश्चात बेगम ने आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर ली। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.